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ईश्वर के अवतारों का उपहास उड़ाने वाले एक विधर्मी राजा को सेवक ने करारा जवाब देकर किया पानी-पानी

ईश्वर के अवतारों का उपहास उड़ाने वाले एक विधर्मी राजा को सेवक ने करारा जवाब देकर किया पानी-पानी

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अकबर ने राजनीतिक कारणों से जोधाबाई से विवाह तो कर लिया, उन्हें महल में पूजा-पाठ की अनुमति भी दे दी, लेकिन हिंदू धर्म को लेकर उसके मन में आदर न था.

एक बार हिंदुओं के देवताओं पर चुटकी लेते अकबर ने बीरबल से कहा- तुम्हारे भगवान और हमारे खुदा में बहुत फर्क है.

हमारा खुदा दुनिया में जब भी जरूरत हो अपने पैगम्बर भेज कर काम कर देता है, जबकि तुम्हारा भगवान बारबार आता है. तुम्हारे भगवान को अपने दूतों पर इतना अविश्वास क्यों है?

बीरबल ने उस समय कुछ बोलना उचित न समझा. बस इतना कहा ईश्वर को बार-बार क्यों आना पड़ता है, इसका मर्म तब समझ में आएगा जब आपको व्यवहारिक अनुभव होगा.

बात बीरबल के मन में लग गई थी कि ईश्वर का उपहास करने वाले राजा को सबक सिखाना पड़ेगा.

बीरबल जानते थे कि ईश्वर के चमत्कार देखकर भी अकबर के आंख पर पड़ी पट्टी नहीं हटेगी. इसलिए कुछ और रास्ता खोजना पड़ेगा.

बीरबहमारा फेसबुक पेज लाईक करें.ल ने एक युक्ति लगाई. उन्होंने अकबर को एक दिन यमुना में परिवार समेत नौका विहार करने को राजी किया.

वहां कुछ बड़ी नावों की व्यवस्था पहले से ही करवा दी थी. यमुना का लबालब भरी थी. पानी उछाल मार रहा था.

जिस नाव में बीरबल ने अकबर को बिठाया उसी नाव में एक तरफ एक दासी अकबर के दुधमुंहे बेटे के साथ बैठी.

बीरबल ने अकबर के बेटे की शक्ल का एक मोम का पुतला भी बनवाया. उसे हुबहू राजकुमार जैसे कपड़े पहना दिए गए. पुतला अकबर का बेटा दिख रहा था.

दासी को बीरबल ने सब कुछ सिखा दिया था. नाव जब यमुना के बीच पहुँची और हिलने लगी तब दासी ने ऐसा स्वांग रचा जैसे बच्चा उछलकर पानी में गिरा हो.

उसने मोम के पुतले को नदी में गिराकर चिल्लाना शुरू कर दिया. अकबर ने उसकी चीख सुनी और समझ गया कि उसका शहजादा नदी में गिर गया है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.अपने बेटे को बचाने के लिए अकबर तुरंत यमुना में कूद गया. गोते मारकर बड़ी मुश्किल से उसने बच्चे को पानी में से निकाला.

बाहर आते ही उसने देखा कि यह तो बच्चा नहीं मोम का पुतला था. वह आग-बबूला हो गया और उसने दासी का सिर काटने के लिए तलवार खींच ली.

बीरबल सामने खड़े हो गए. उन्होंने कहा कि इसमें दासी का दोष नहीं है. उसने मेरे कहने से यह किया.

अकबर ने गुस्से में कारण पूछा तो बीरबल ने कहा- जहाँपनाह! आपकी बेइज्जती के लिए नहीं बल्कि आपके प्रश्न का उत्तर देने के लिए मुझे ऐसा करना पड़ा.

आप पुतले को अपना पुत्र समझकर नदी में कूद पड़े. जबकि इसी नाव में आपके साथ कई नामी तैराक बैठे थे.

आप उनमें से किसी को भी कूदकर बेटे की रक्षा का आदेश दे सकते थे, लेकिन आपने ऐसा नहीं किया, क्यों?
अकबर ने कहा-बीरबल! यदि अपना बेटा डूबता हो तो अपने मंत्रियों या तैराकों को कहने की फुर्सत कहाँ रहती है? खुद ही कूदा जाता है.

बीरबल बोले- जैसे अपने बेटे की रक्षा के लिए आप खुद कूद पड़े, ऐसे ही हमारे भगवान जब भी अपने बच्चों को संसार की मुसीबतों में डूबता हुआ देखते हैं, वे किसी पैगम्बर या दूत को नहीं भेजते, खुद ही रक्षा के लिए प्रकट हो जाते हैं.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.वे अपने बेटों की रक्षा के लिए स्वयं अवतार लेते हैं, अपनी संतान की तरह संसार की मुश्किलों का सामना करते हुए अपने बच्चों को जीवन का मूल्य सिखाते हैं.

यही फर्क है आपके खुदा और मेरे भगवान में. किसी और की आस्था का अपमान करने वाले को स्वयं अपमानित होना पड़ता है.

संकलन व प्रबंधन: प्रभु शरणम् मंडली

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