नवरात्रि हवन विधिः घर में खुद करें दुर्गा नवमी का हवन इन 5 सरल स्टेप से

नवरात्रि हवन विधिः घर में खुद करें दुर्गा नवमी का हवन इन 5 सरल स्टेप से

नवरात्रि हवन विधिः स्टेप-बाय-स्टेप एकदम सरल शब्दों में

शारदीय व चैत्र नवरात्रि में पूर्ण फल प्राप्ति के लिए सही नवरात्रि हवन विधि जानना आवश्यक है। यदि आप सोच रहे हैं कि घर पर नवरात्रि हवन कैसे करें, हवन सामग्री लिस्ट कैसे तैयार करें, नवरात्रि हवन मंत्र क्या हैं जिनसे आहुति दें तो आपकी सारी चिंता इस पोस्ट से दूर हो जाएगी।

नवरात्रि के नौ दिनों के व्रत, जप और साधना की पूर्णता अष्टमी या नवमी तिथि को किए जाने वाले हवन से होती है।

अक्सर व्रतियों के सामने यह समस्या आती है कि नवमी के दिन अत्यधिक व्यस्तता के कारण योग्य पुरोहित या पंडित जी समय पर उपलब्ध नहीं हो पाते। शास्त्रों के अनुसार, यदि आपके मन में सच्ची श्रद्धा और निष्ठा है, तो आप स्वयं भी अपने परिवार के साथ घर पर शास्त्रों सम्मत सरल नवरात्रि हवन विधि संपन्न कर सकते हैं।

इस विस्तृत गाइड में हम जानेंगे कि बिना किसी जटिलता के घर पर नवरात्रि हवन कैसे करें।

घर पर नवरात्रि हवन विधि - Step by Step Navratri Havan Vidhi
सरल तरीके से घर पर नवरात्रि हवन विधि स्टेप-बाय-स्टेप विधि

नवरात्रि हवन सामग्री लिस्ट (Navratri Havan Samagri List)

हवन शुरू करने से पूर्व सभी आवश्यक सामग्री एक बड़ी थाली में व्यवस्थित कर लें:

  • हवन कुंड व समिधा: छोटा हवन कुंड (तांबे या मिट्टी का), सूखी आम की लकड़ियां (समिधा), देशी कपूर।

  • हवन सामग्री मिश्रण: जौ (जवा), काले तिल, साबुत अक्षत (चावल), शुद्ध गाय का घी, बूरा या शक्कर, गुग्गल, लोबान, अगर-तगर।

  • सूखे मेवे व पूजा द्रव्य: सूखा नारियल (गोला/गिरी), मखाना, लौंग, छोटी इलायची, बताशे, कलावा (मौली), पान के पत्ते, साबुत सुपारी।

  • पूर्णाहुति हेतु: एक साबुत सूखा नारियल (जटा वाला या गोला) और लाल कलावा।

दशांश हवन क्या है और यह क्यों जरूरी है?

दशांश हवन की जरूरत तब होती है जब आपने संकल्प के साथ कुछ मंत्रों का जप एक निश्चित अवधि में किया हो तो उसका दसवां हिस्सा हवन करना होता है। यह देवता का भाग है जिसे अग्नि के माध्यम से उस देवता तक पहुँचाना जरूरी है। एक

उदाहरण के लिए यदि आपने नवरात्रि में किसी विशेष मंत्र (जैसे नवार्ण मंत्र या गायत्री मंत्र) का संकल्प लेकर सवा लाख, 21 हजार या 11 हजार का निश्चित जप किया है। शास्त्रों के अनुसार उसका दशांश (10%) हवन करना अनिवार्य होता है।

  • दशांश गणना: यदि आपने 11,000 जप किए हैं, तो उसका 10% यानी 1100 आहुतियां देनी होंगी। जिस मंत्र का आपने जप किया है उसी मंत्र को जपते हुए अंत में स्वाहा लगाएं और कुंड में आहुति डाल दें।

  • पारिवारिक सहयोग का नियम: यदि आहुतियों की संख्या अधिक है, तो परिवार के सदस्य मिलकर एक साथ आहुति दे सकते हैं। जैसे आपने 11000 जप किया और उसका दशांश यानी 1100 आहुति डालनी है। एक व्यक्ति यदि डाले तो इसमें लंबा समय लगेगा। इसका सरल तरीका है कि परिवार के जनों को शामिल कर लें.

    परिवार के पांच व्यक्ति साथ बैठकर आहुति डाल रहे हैं तो 1100 में पांच का भाग कर दें। यदि पाचों व्यक्ति एक साथ आहुति डालें तो सिर्फ 210 आहुति में 1,100 आहुतियां पूर्ण मानी जाती हैं। आशा है आप इसे समझ गए होंगे।

  • नवरात्रि की सामान्य पूजा वालों के लिए नियम: यदि आपने कोई विशेष संख्या का संकल्प नहीं लिया था, आपने केवल दुर्गा सप्तशती पाठ किया है या सामान्य उपवास रखा है, तो 108 आहुतियों का सामान्य हवन करना ही पूर्ण फलदायी होता है। आप चाहें तो ज्यादा भी कर सकते हैं पर 108 आहुति भी पर्याप्त है। नवरात्रि हवन विधि में भी परिवार वाला नियम लागू हो सकता है।

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घर पर नवरात्रि हवन कैसे करें: नवरात्रि हवन विधि स्टेप-बाय-स्टेप विधि

1. तैयारी और वेदी निर्माण

  • हवन कर्ता का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।

  • हवन कुंड को ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) या पूर्व दिशा में एक चौकी पर रखें। वेदी पर थोड़ा गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।

  • हवन कुंड में आम की लकड़ियों को चौकोर (पिरामिड आकार) में सजाएं और मध्य में कपूर रखें।

  • कपूर प्रज्वलित करके अग्नि देव का आह्वान करें और समिधा को जलने दें।

2. अग्नि प्रदीप्त होने पर घी की प्रारंभिक आहुतियां (पंच घृत आहुति)

जब अग्नि भली-भांति प्रज्वलित हो जाए, तब केवल शुद्ध देसी घी से चम्मच या आम के पत्ते से ये पांच आहुतियां दें (आहुति देते समय अनामिका यानी (Ring Finger), मध्यमा यानी यानी (Middle Finger) और अंगूठे (Thumb) का प्रयोग करें):

  • ॐ प्रजापतये स्वाहा। इदं प्रजापतये न मम।

  • ॐ इन्द्राय स्वाहा। इदं इन्द्राय न मम।

  • ॐ अग्नये स्वाहा। इदं अग्नये न मम।

  • ॐ सोमाय स्वाहा। इदं सोमाय न मम।

  • ॐ भूः भुवः स्वः स्वाहा।

3. नवग्रह और प्रमुख देवताओं की आहुति

इसके बाद घी मिली हुई हवन सामग्री से इन मंत्रों द्वारा क्रमशः आहुति दें:

  • ॐ गं गणपतये नमः स्वाहा। (प्रथम पूज्य गणेश जी)

  • ॐ सूर्याय नमः स्वाहा।

  • ॐ चन्द्राय नमः स्वाहा।

  • ॐ भौमाय नमः स्वाहा।

  • ॐ बुधाय नमः स्वाहा।

  • ॐ बृहस्पतये नमः स्वाहा।

  • ॐ शुक्राय नमः स्वाहा।

  • ॐ शनैश्चराय नमः स्वाहा।

  • ॐ राहवे नमः स्वाहा।

  • ॐ केतवे नमः स्वाहा।

  • ॐ कुलदेवतायै नमः स्वाहा।

  • ॐ स्थानदेवतायै नमः स्वाहा।

  • ॐ हनुमते नमः स्वाहा।

  • ॐ भैरवाय नमः स्वाहा।

4. गायत्री मंत्र आहुति (3 या 5 बार)

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् स्वाहा।


नवरात्रि हवन विधि में दुर्गा नवमी हवन मंत्र (मुख्य आहुतियां) का पालन करें

1. नवार्ण मंत्र आहुति (कम से कम 108 बार)

मां भगवती की पूर्ण कृपा प्राप्ति के लिए नवार्ण मंत्र से 108 आहुतियां या 21 आहुतियां अवश्य देनी चाहिए:

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा।

2. महामंत्र आहुति

ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते स्वाहा॥

3. दुर्गा सप्तशती के पंचम अध्याय के मंत्रों से आहुति

सप्तशती के 5वें अध्याय में देवताओं द्वारा की गई स्तुति अत्यंत कल्याणकारी मानी गई है। इसके प्रमुख श्लोकों के अंत में स्वाहा लगाकर आहुति दें:

  • या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा॥

  • या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा॥

  • या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा॥

  • या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा॥

  • या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः स्वाहा॥

हवन की पूर्णाहुति कैसे करें?

सभी सामान्य आहुतियां संपन्न होने के बाद पूर्णाहुति दी जाती है:

  1. सूखे नारियल (गोले) के ऊपरी हिस्से को काट लें।

  2. उसमें घी, बताशा, लौंग, सुपारी, जायफल, पान का टुकड़ा और बची हुई हवन सामग्री भरें।

  3. नारियल के चारों ओर कलावा (मौली) लपेटें।

  4. खड़े होकर दोनों हाथों से नारियल को पकड़ें और निम्न वैदिक पूर्णाहुति मंत्र बोलते हुए उसे प्रज्वलित अग्नि के मध्य अर्पित करें:

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।

पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते स्वाहा॥

दुर्गाजी की आरती


हवन के बाद के आवश्यक नियम (आरती, क्षमा याचना व भस्म विसर्जन)

  • आरती: पूर्णाहुति के बाद परिवार सहित खड़े होकर माता दुर्गा, भगवान गणेश और महादेव की कपूर से आरती करें।

  • क्षमा प्रार्थना: हवन के अंत में हाथ जोड़कर देवी से अज्ञात भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना अवश्य करें:

    “हे माँ जगदम्बिके! मैं मंत्र, क्रिया और भक्ति से हीन हूँ। मैंने जो कुछ भी यथाशक्ति आहुति दी है, उसे अपनी कृपा से पूर्ण मानकर स्वीकार करें।”

  • तिलक व प्रसाद: हवन की शीतल भस्म का तिलक परिवार के सभी सदस्यों के माथे पर लगाएं। इसके बाद कन्या पूजन कर भोग व प्रसाद वितरित करें।

  • भस्म का विसर्जन: हवन कुंड की अग्नि को पानी डालकर कभी न बुझाएं, उसे स्वयं शांत होने दें। अगले दिन जब भस्म पूरी तरह ठंडी हो जाए, तो उसे किसी पवित्र नदी या घर के गमलों/पेड़ों की मिट्टी में विसर्जित करें। इसे पैरों में या कूड़ेदान में न जाने दें।


नवरात्रि हवन विधि से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्र. क्या महिलाएं घर में हवन कर सकती हैं?

उत्तर: हाँ, सनातन धर्म में महिलाएं घर में हवन कर सकती हैं और आहुतियां दे सकती हैं। दुर्गा नवमी हवन विधि में भी इसका पालन किया जा सकता है। घर की स्त्रियों का परिवार के साथ बैठकर देवी पूजन और आहुति देना अत्यंत शुभ माना जाता है।

प्र. नवरात्रि में हवन किस दिशा में मुख करके बैठना चाहिए?

उत्तर: नवरात्रि हवन की विधि या किसी भी पूजा अनुष्ठान के बाद हवन करते समय साधक का मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना सबसे उत्तम और फलदायी माना गया है। लेकिन जब एक से अधिक लोग हैं तो गोल घेरा बनाकर बैठना चाहिए।

प्र. यदि हवन सामग्री बीच में समाप्त हो जाए तो क्या करें?

उत्तर: यदि हवन सामग्री कम पड़ जाए, तो केवल शुद्ध देशी घी, अक्षत (चावल) या बताशे से भी आहुतियां पूरी की जा सकती हैं। पूजा में भाव और श्रद्धा ही सर्वोपरि है।


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