बुद्ध का यह ज्ञान कर सकता है बड़ी समस्याओं का सरलता से निदान

प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना WhatsApp से चाहते हैं तो अपने मोबाइल में हमारा नंबर 9871507036 Prabhu Sharnam के नाम से save कर लें। फिर SEND लिखकर हमें उस नंबर पर whatsapp कर दें।
जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना whatsapp से मिलने लगेगी।
एक बार भगवान बुद्ध ने किसी स्थानपर डेरा डाला था. बुद्ध के साथ उनके बहुत से शिष्य भी साथ चलते थे. एक दिन बुद्ध के शिष्यों के बीच समस्याओं के कारण और उसके समाधान के विषय पर चर्चा चल रही थी.
सभी अपने-अपने तर्क दे रहे थे लेकिन किसी एक बात पर सभी की सहमति बन नहीं पा रही थी. अंततः निर्णय हुआ कि इस प्रश्न को भगवन् के समक्ष रखा जाए. वही इसका सही समाधान करेंगे.
बुद्ध ने सबके तर्क को बड़े इत्मिनान से सुना. उनकी बातें सुनते-सुनते ही बुद्ध ने एक रस्सी में गांठें लगाईं. फिर शिष्यों से पूछा- बोले क्या अब भी यह वही रस्सी है, जो कुछ समय पहले थी?
एक शिष्य ने जवाब दिया- भगवन् यह तो हमारे देखने के तरीके पर निर्भर है. एक नजरिए से देखें तो यह वही रस्सी दिखाई पड़ती है लेकिन दूसरी तरह से देखें तो अब यह बदल गई है. फिर भी इसमें लगी गाठों के बावजूद इसका बुनियादी स्वरूप तो वही है.
बुद्ध ने अन्य शिष्यों का विचार समझने के लिए उनकी तरफ देखा. सभी मौन ही रहे लेकिन बुद्ध ने उनके मन का भाव पढ़ा. वे अपने साथी के विचारों के साथ संतुष्ट और सहमत ही नजर आए.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.बुद्ध ने कहा- अच्छी बात है. अब मैं इसको खोलने का प्रयास करता हूँ. इतना कहकर वह रस्सी के दोनों सिरों को खींचने लगे. उन्हें ऐसा करते देख शिष्यों ने कहा- भगवन इससे गांठें खुलने के स्थान पर और ज्यादा कस जायेंगी. फिर तो शायद खोलना संभव भी न हो पाए.
तब बुद्ध ने पूछा- यदि ऐसा है तो फिर हमें इसकी गांठें खोलने के लिए क्या करना होगा क्योकि गांठें लग जाने के बाद इस रस्सी की उपयोगिता तो बहुत कम हो चुकी है? रास्ता निकालो.
इस पर एक शिष्य ने कहा- रस्सी को खींचने से पहले हमें यह समझना होगा कि इनमें गांठें कैसे लगाई गईं हैं. फिर उसके अनुरूप निर्णय करना होगा कि किस दिशा में रस्सी को खींचने की आवश्यकता है.
बुद्ध इस उत्तर से संतुष्ट थे. वह बोले- ठीक. यानी समस्या का कारण जाने बिना उसका निवारण असम्भव है. इन गाठों को जिस क्रम में लगाया गया है उसके विपरीत क्रम में अगर खींचा जाए तो यह आसानी से खुल जायेंगी.
यदि उसी क्रम में खींचा जाए तो खुलने की बजाय इतना कस जाएंगी कि रस्सी अनुपयोगी हो जाए. इसे फेंकना ही पड़े. यही तुम्हारे प्रश्न का उत्तर है. समस्या के मूल में ही उसका निदान छुपा होता है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.जिस प्रकार रस्सी की गाठों की दिशा समझकर हम उसे खोल सकते हैं, वैसे ही सभी समस्याएं भी हल कर सकते हैं. हम गांठों की दिशा समझने के बजाय गांठों को अपने कुतर्कों से सही साबित करने में जुट जाते हैं.
गलती सभी से होती है, यह स्वाभाविक है. गलती का आभास होते ही उसमें संशोधन का प्रयास करना चाहिए. जो व्यक्ति जीवन में इतना बड़ा हृद्य दिखा पाता है. मनुष्य अंजाने में गांठें खोलने के बजाय उन्हें कसता जाता है.
परिणाम यह होता है कि मामला सुलझने के बजाय उलझता चला जाता है. गांठें लगने पर भी रस्सी का बुनियादी स्वरूप वही रहता है उसी प्रकार किसी कारण विकार आ जाने पर भी हमारे अंदर की अच्छाई पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाती.
हम पुनः शुरुआत कर सकते हैं. जो अपने अहम को किनारे कर सूझबूझ के साथ निर्णय कर पाता है वही सफल हो जाता है. सफलता और असफलता एक दोराहे पर खड़े दिशासूचक हैं. एक रास्ता सफलता की ओर लेकर जाएगा दूसरा असफलता की ओर.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.गांठे लगाने वाली डगर असफलता की है, खोलने वाली सफलता की ओर. अपने निकटजनों के साथ उलझकर आप अपनी ऊर्जा को व्यर्थ करते हैं. उस ऊर्जा का प्रयोग आप दौड़ में अपनी गति बढ़ाकर सफलता को तीव्र करने में करिए.
नववर्ष में क्यों न सोच की दिशा बदलकर एक प्रयोग कर ही लिया जाए. क्या पता कुछ चमत्कारिक परिणाम निकल आएं. नववर्ष की मंगलकामनाएं.
संकलनः चंद्र किरण
संपादनः राजन प्रकाश
(यह कथा चंद्रकिरणजी ने भेजी. इंदौरवासी चंद्रकिरण जी प्रभु शरणम् की सक्रिय सहयोगी हैं. धार्मिक-आध्यात्मिक विषयों में इनकी गहरी रुचि और समझ है.)
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
ये भी पढ़ें-
शनि को सभी क्रूर समझते हैं पर क्या जानते हैं शनिदेव को अकारण ही मिला था यह शाप
करियर की बाधाओं का ज्योतिष से निकाल सकते हैं हलः करियर में सफलता के लिए सरल और बिना खर्च वाले उपाय
कहीं आप भी तो नहीं करते वही काम जिससे राजा भोज जैसे विद्वान मूर्खराज कह दिए गए- प्रेरक कथा
प्रभु श्रीराम का सम्मान, धर्मसंकट में सेवक श्री हनुमानः हनुमानजी की भक्ति कथा
हम ऐसी कथाएँ देते रहते हैं. Facebook Page Like करने से ये कहानियां आप तक हमेशा पहुंचती रहेंगी और आपका आशीर्वाद भी हमें प्राप्त होगा: Please Like Prabhu Sharnam Facebook Page