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एक गाय का मूल्य कितना हो सकता है? पुराण की इस कथा से जानिए गाय का मूल्य

एक गाय का मूल्य कितना हो सकता है? पुराण की इस कथा से जानिए गाय का मूल्य

kamdhenu
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महर्षि च्यवन एक बार नदी के जल में समाकर तपस्या कर रहे थे. कई वर्षों तक वह पानी के भीतर ही रहे. नदी के जीवों से उन्हें प्रेम हो गया था.

नदी के जीव भी उन्हें बहुत प्रेम करते थे. वे उनके शरीर पर दिनभर विचरते, गुदगुदी करते और तरह-तरह की चुहल करते जैसे बच्चे अपने पिता के साथ करते हैं.

मल्लाहों ने मछलियां पकड़ने के लिए जाल डाला. उसमें फंसकर कई मछलियां मर गईं. च्यवन भी उसमें उलझ गए. जाल बाहर आया तो मछलियों, कछुओं के साथ ऋषि भी थे.

मछुआरों को ऋषि के शाप का भय हुआ. उन्होंने पैर पकड़कर क्षमा मांगी. ऋषि ने कहा कि वह तभी जाएंगे अगर मछुआरे मछलियों और दूसरे जीवों को भी मुक्त कर दें.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.मछुआरों ने कहा- यह तो हमारा आधार है. आप हमारे परिजनों को भूखा न मारें. ऋषि अड़े रहे कि कि वह जाल से तभी निकलेंगे यदि उनकी संतान जैसे इन जल के जीवों को भी मुक्त किया जाए.

मछुआरों ने जाल समेत च्यवन को राजा नहुष के सामने पेश किया. वह भी उलझन में पड़े. च्यवन ने कहा- महाराज आप मुझे और मेरी संतानों को मोलकर खरीद लें और मुक्त कराएं.

नहुष ने मछुआरों को 1000 सोने के सिक्के दिए. वे खुशी-खुशी राजी हो गए. लेकिन च्यवन ने कहा कि आपने मछलियों का मोल तो लगाया, मेरा मोल भी लगाओ. मैं भी इनका शिकार हूं.

नहुष ने दस गुना ज्यादा सिक्के दिए. च्यवन फिर वही बात कहने लगे. उन्होंने कहा- एक तपस्वी का मोल क्या 9000 सिक्के ही होंगे.

नहुष ने अब एक लाख सिक्के दिए. च्यवन मानने को राजी न थे कि अब भी उनकी उचित कीमत चुकाई गई है.

नहुष सिक्के बढ़ाते रहे पर ऋषि को संतोष ही न होता. च्यवन ने कहा- आप मंत्रणाकर मेरा मोल तय करें, वरना मैं तो मछुआरों के साथ जाउंगा. उनके बंदी के रूप में.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.सबने बुद्धि लगाई लेकिन कोई राह न सूझी. नहुष किसी धर्मसंकट में हैं यह बात फैली. विद्वान और बडे-बड़े महर्षि नहुष पर बहुत स्नेह रखते थे. उनके कष्ट से आहत होते थे.

महर्षि गोकर्ण को पता चला तो वह नहुष के पास आए. गोकर्ण ने कहा- महाराज च्यवन जैसे महर्षि का मोल सोने-चांदी में क्या लगेगा! उनका स्वभाव गाय जैसा सरल व दयालु है.

नहुष तुरंत समझ गए. उन्होंने कहा- महर्षि च्यवन आपका मोल तो संसार की किसी भी संपत्ति से नहीं लगाया जा सकता. मैं आपके बदले मछुआरे को बस एक गाय दे सकता हूं.

च्यवन नहुष पर बड़े प्रसन्न हुए. वह जाल से बाहर आ गए. मछुआरों को एक लाख सिक्के दे दिए गए.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.च्यवन ने नहुष को बताया कि अपनी तपस्या से अमृत जैसा उपयोगी रसायन बनाया है. उन्होंने रसायन की विधि नहुष को दे दी ताकि वह प्रजा के कष्ट दूर कर सकें. वही रसायन च्यवनप्राश कहा जाता है.

(महाभारत की कथा)

संकलन व संपादनः राजन प्रकाश

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