ब्रह्मदेव के नयनअमृत व नारायण के चरणअमृत के दिव्य संयोग से उपजा था प्रथम वृक्ष आंवला

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एक कल्प की बात है. समस्त संसार समुद्र में समा गया. अपने द्वारा रचित सृष्टि के विनाश हो जाने से ब्रह्माजी दुखी थी. उन्होंने सृष्टि की पुनः रचना करने का विचार किया किंतु कहां से आरंभ करें इस उधेड़बुन में थे. उन्हें कोई राह दिखाई नहीं पड़ रही थी.

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