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स्वर्ग का अमृत, संतान, धन व आरोग्य चाहिए तो आज करें आंवला की पूजा: आंवला नवमी पूजा की वैदिक विधि

स्वर्ग का अमृत, संतान, धन व आरोग्य चाहिए तो आज करें आंवला की पूजा: आंवला नवमी पूजा की वैदिक विधि

lord vishnu
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कार्तिक शुक्ल नवमी को अक्षय नवमी या आंवला नवमी कहा जाता है, पुराणों के मतानुसार, त्रेता युग का प्रारंभ इसी दिन से हुआ था. माना जाता है कि अक्षय नवमी को श्रीकृष्ण ने मथुरा-वृंदावन की परिक्रमा कर कंस के अत्याचारों के विरुद्ध जनता को जगाया और अगले दिन कंस का वध किया.

अक्षय नवमी से लेकर पूर्णिमा तक भगवान श्रीविष्णु आंवले के वृक्ष पर निवास करते हैं. भगवान विष्णु ऐसा ब्रह्माजी को दिए अपने एक वचन को निभाने के लिए करते हैं.

भगवान ने ब्रह्माजी को ऐसा क्या वचन दिया था उसकी कथा अगले पोस्ट में बताएंगे. अभी अक्षय नवमी या आंवला नवमी की पूजा की सरलतम वैदिक विधि और कथा विस्तार से सुनिए.

संतानहीन स्त्रियां खासतौर से संतान की कामना के साथ अक्षय नवमी को आंवला पेड़ की पूजा, परिक्रमा और दान आदि करती हैं. अक्षय नवमी की कथा में एक निःसंतान दंपत्ती को इस पूजा के प्रभाव से संतान की प्राप्ति की बात कही गई है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.कैसे करें अक्षय नवमी की पूजाः

सबसे पहले देवी कूष्मांडा की आराधना की जाती है. उनका स्मरण करते हुए निम्न मंत्र का उच्चारण करेंः

दुर्गति नाशिन त्वहं दरिद्रादि विनाशनीम्।
जयदां धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यम् अहं।।

इसके बाद कर्पूर जलाकर नीचे लिखे मंत्र से आंवला वृक्षकी पूजा करने के बाद परिक्रमा करें एवं अक्षय सुख-समृद्धि एवं आरोग्य की कामना करें. आंवले के चारों तरफ कच्चा सूत की रक्षा लपेटी जाती है. आंवला वृक्ष की 108 बार परिक्रमा का विधान है.

मंत्रः
यानि कानि च पापानि जन्मातरकृतानि च।
तानि तानि प्रणश्यन्ति प्रदक्षिण पदे पदे।।

परिक्रमा पूरी करने के बाद आंवला वृक्ष के नीचे पूर्व दिशा में मुख करके “ऊं धात्र्ये नमः” मंत्र से आंवले की जड़ में दूध की धार गिराते हुए पितरों को तर्पण करें. कर्पूर व घी के दीपक से आरती कर प्रदक्षिणा करें.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.अक्षय नवमी को आंवला वृक्ष से अमृत की बूंदें टपकती हैं इसलिए उस दिन आवंले के वृक्ष के नीचे भोजन करने से बहुत से रोगों में लाभ मिलता है. अक्षय नवमी पर किए गए दान का प्रभाव कार्तिक मास के अन्य दिनों पर किए गए दान से ज्यादा पुण्यदायी होता है.

मान्यता है कि आंवला नवमी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने और कुम्हड़े का दान करने से कुम्हड़े में जितने बीज होते हैं उतने ही साल तक दानकर्ता को स्वर्ग में वास करने का अधिकार मिलता है. यदि अक्षय नवमी को आपने एक आंवले का वृक्ष लगा दिया तो एक राजसूय यज्ञ के बराबर फल मिलता है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.यदि आप अक्षय नवमी को कुछ दान कर रहे हैं तो इस मंत्र के साथ दान का संकल्प अवश्य लें, अन्यथा आपका दान व्यर्थ चला जाएगा.

दान के संकल्प का मंत्रः
मम् अखिलपापक्षयपूर्वक सुख सौभाग्य आदिनाम् उत्तरोत्तराभि वृद्धये कूष्माण्ड दानं करिष्ये।

इस संकल्प के साथ यथाशक्ति दान करना चाहिए. उसके बाद अक्षय नवमी की कथा सुननी चाहिए और फिर भोजन करना चाहिए.

।।अक्षय नवमी एवं आंवला नवमी की कथा।।

एक व्यापारी जो बहुत ही धर्मात्मा और दानी था वह अपनी पत्नी के साथ काशी में रहता था. उनकी कोई संतान नहीं थी. इसी कारण व्यापारी की पत्नी हमेशा दुखी सी रहती थी और उसका स्वभाव भी चिड़चिड़ा हो गया था.

एक दिन उसे किसी ने कहा कि अगर वो संतान चाहती हैं तो वह किसी जीवित बच्चे की बलि भैरव बाबा के सामने दे. इससे उसको संतान प्राप्ति हो जाएगी. उसने यह बात अपने पति से कही लेकिन उसके धर्मात्मा पति ने इस बात के लिए उसे बहुत डांटा.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.पर व्यापारी की पत्नी को संतान प्राप्ति की चाह ने इस तरह से मोह में डाल दिया था कि उसने अच्छे बुरे की समझ को ही त्याग दिया और एक दिन एक बच्चे की बलि भैरव बाबा के सामने दे दी, जिसके परिणाम स्वरूप उसे कई रोग हो गये.

पत्नी की यह हालत देख व्यापारी बहुत दुखी था. उसने इसका कारण पूछा. तब उसकी पत्नी ने बताया कि उसने एक बच्चे की बलि दी थी संभवतः उसी के कारण ऐसा हुआ.

यह सुनकर व्यापारी को बहुत क्रोध आया और उसने उसे बहुत पीटा. पर बाद में उसे अपनी पत्नी की दशा पर दया आ गई और उसने उसे सलाह दी कि वो अपने इस पाप की मुक्ति के लिए गंगा में स्नान करे और सच्चे मन से प्रार्थना करे.

व्यापारी की पत्नी ने वही किया जो पति ने आदेश किया था. कई दिनों तक गंगा स्नान किया और तट पर पूरी श्रद्धा के साथ पूजा की. इससे प्रसन्न होकर माता गंगा ने एक बूढी औरत के रूप में व्यापारी की पत्नी को दर्शन दिए.

गंगा मैया ने कहा उसके शरीर के सारे विकार दूर करने हो सकते हैं यदि वह कार्तिक मास शुक्लपक्ष की नवमी के दिन वृंदावन में आंवले का व्रत रखकर उसकी पूजा करेगी. इससे उसके सभी कष्ट दूर होंगे.

व्यापारी की पत्नी ने बड़े विधि विधान के साथ पूजा की और उसके शरीर के सभी कष्ट दूर हुए. उसे सुंदर शरीर प्राप्त हुआ. साथ ही उसे पुत्र की प्राप्ति भी हुई. तब से ही महिलाएं संतान प्राप्ति की इच्छा से आंवला नवमी का व्रत रखती हैं.
संकलन व संपादनः राजन प्रकाश
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