Advertisement728 × 90

शिवरात्रि पूजा की पूरी और सरलतम विधिः प्रदोष काल में करें पूजन

शिवरात्रि पूजा की पूरी और सरलतम विधिः प्रदोष काल में करें पूजन

शिवरात्रि पूजा का महत्व बताने से पहले आपको एक जानकारी देने के साथ शुरुआत करते हैं. आपने इस पेज को क्लिक किया इसका अर्थ है कि आपमें शिवजी के प्रति श्रद्धा है. आपको शिवजी से जुड़ी जानकारियों की ललक है, शिव महिमा को जानने-समझने की ललक है. उसे सुनकर आनंदित होते हैं.

शिवजी की विधिवत पूजा कैसे होती है, अभिषेक के नियम क्या हैं. प्रदोष कैसे करना चाहिए. शिवजी के किन मंत्रों से पूजा करने से प्राप्त होते हैं मनचाहे अभीष्ट. उन मंत्रों के जप की विधि क्या है? ये सारी जानकारी देने वाला एक एप्प है-महादेव शिव शंभू. इसमें आप संक्षिप्त और सरल रूप में शिवपुराण भी पढ़ सकते हैं. आप स्वयं आजमाकर देखें.

इस लाइन के नीचे एप्प का लिंक हैं. डाउनलोड करें- MAHADEV SHIV SHAMBHU APPS.

MAHADEV SHIV SHAMBHU एप्प डाउनलोड के लिए यह लिंक क्लिक करेंः
Android महादेव शिव शंभुशिवरात्रि का सृष्टि से सरोकारः

शिवजी को बहुत प्रिय है शिवरात्रि. वैसे तो प्रत्येक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मास शिवरात्रि होती है. इन शिवरात्रियों में सबसे प्रमुख है फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी जिसे महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है.

क्यों इतनी महत्वपूर्ण है शिवरात्रिः

-फाल्गुन मास की कृष्णपक्ष की चतुर्दशी की रात में पार्वतीजी और महादेव का विवाह हुआ था इसलिए यह शिवरात्रि वर्ष भर की शिवरात्रि से उत्तम है.

-शिवजी तो विरक्त हैं. माया से मुक्त परंतु उन्होंने यह विवाह इसलिए ताकि संसार संन्यास के बीच समाज की उपयोगिता को समझे. सृष्टि को चलाने के लिए सांसारिक होना भी जरूरी है.

-विवाह का दिन सभी स्मरण रखते हैं, उसे सेलिब्रेट करते हैं. तो ऐसा समझ लें कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव अंशरूप में प्रत्येक शिवलिंग में पूरे दिन और रात मौजूद रहते हैं.

-हर महीने में त्रयोदिशी तिथि को जिसे मासशिवरात्रि कहते हैं- भगवान शिवजी, अपनी प्रिया पार्वतीजी को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंगों में साक्षात प्रवेश करते हैं.

-सृष्टि के निर्माण के समय महाशिवरात्रि की मध्यरात्रि में शिव का रूद्र रूप प्रकट हुआ था, शिवपुराण में ऐसा कहा गया है.

-सृष्टि में जब सात्विक तत्व यानी सद्गुण का पूरी तरह अंत हो जाएगा और सिर्फ तामसिक शक्तियां ही रह जाएंगी तब महाशिवरात्रि के दिन ही प्रदोष काल में शिवजी तांडव करेंगे. इससे रूद्रप्रलय होगा और पूरी सृष्टि का अंत हो जाएगा.

-इस तरह शिवरात्रि एक तरह से मानव जाति को स्मरण कराती रहती है कि सात्विक शक्तियों को जीवित रखो अन्यथा सृष्टि का नाश अवश्यंभावी है.

-प्रत्येक माह में शिवरात्रि की तिथि होती है लेकिन फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष त्रयोदशी को महाशिवरात्रि विशेष है.

-श्रावण मास शिवजी का प्रिय मास है इसलिए सावन की शिवरात्रि का भी विशेष महत्व है. यह तिथि भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित मानी गई है.

-सोमवार का दिन महादेव की आराधना का महत्वपूर्ण दिन होता है इसलिए यह तिथि अपने आप में ही श्रेष्ठ मानी जाती है.

अगले पेज पर पढ़ें सबसे सरल विधि से शिवरात्रि पूजा. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.
कैसे करें सरल तरीके से शिवरात्रि की पूजाः

-शिवरात्रि का व्रत रखें और भगवान शंकर, माता पार्वती एवं पूरे शिवपरिवार की पूजा करें.

-पूरा दिन निराहार रहकर इनके व्रत का पालन करना चाहिए.

-यदि पूरे दिन व्रत न रख पाते हों तो प्रदोष काल तक व्रत रख लें और संध्या में पूजा के बाद कुछ सात्विक आहार ग्रहण कर लें.

– भोलेनाथ को जलाभिषेक के बाद आप सात्विक आहार वाला भोजन ले सकते हैं.

जो शिवरात्रि का पूरा व्रत रखते हैं उनके लिए कुछ विधान इस प्रकार हैं-
रात्रि में स्वच्छ वस्त्र धारण कर शुद्ध आसन पर बैठकर भगवान भोलेनाथ का ध्यान करना चाहिए. उनके मंत्र की माला का जाप करना शुभफलदायी होता है. शिवजी की भक्ति के महत्व का वर्णन ऋग्वेद में किया गया है.

-पौराणिक मान्यताओं में दिव्य ज्योर्तिलिंग का उद्भव भी चतुर्दशी तिथि को ही माना गया है. शिव चतुर्दशी में भगवान शंकर की पूजा उनके परिवार के सदस्यों सहित की जाती है.

-जल, दूध, दही, शुद्ध घी, शहद, शक्कर या चीनी,गंगाजल तथा गन्ने के रस में से जो भी उपलभ्द हो सके उससे शिवलिंग का अभिषेक करें.

-अभिषेक पश्चात बेलपत्र, शमीपत्र, कुशा तथा दूब इत्यादि जो भी उपलब्ध हो उसे अर्पण कर सकते है. भांग, धतूरा तथा श्रीफल भोलेनाथ को भोग के रूप में चढाएं.

-इस व्रत में चारों पहर में पूजन किया जाता है, चारों पहर में किये जाने वाले इन मंत्र जापों से विशेष पुण्य प्राप्त होता है.

-रुद्राभिषेक करने से भगवान शंकर अत्यन्त प्रसन्न होते है.

मासिक शिवरात्रि को शिवजी की आराधना इन 17 मंत्रों से करेंः-

हर मासिक शिवरात्रि को सूर्यास्त के समय अपने घर में या शिवालय में शिवजी का स्मरण करते करते ये 17 मंत्र बोलें.

आस-पास शिवजी का मंदिर तो जिनके सिर पर कर्जा ज्यादा हो, गृहकलह हो वे शिवमंदिर जाकर दीपक जलाकर इन 17 मंत्रों से शिवजी का स्मरण कर संकट मुक्ति दिलाने की प्रार्थना करें–

१) ॐ शिवाय नम:
२) ॐ सर्वात्मने नम:
३) ॐ त्रिनेत्राय नम:
४) ॐ हराय नम:
५) ॐ इन्द्र्मुखाय नम:
६) ॐ श्रीकंठाय नम:
७) ॐ सद्योजाताय नम:
८) ॐ वामदेवाय नम:
९) ॐ अघोरहृदयाय नम:
१०) ॐ तत्पुरुषाय नम:
११) ॐ ईशानाय नम:
१२) ॐ अनंतधर्माय नम:
१३) ॐ ज्ञानभूताय नम:
१४) ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नम:
१५) ॐ प्रधानाय नम:
१६) ॐ व्योमात्मने नम:
१७) ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम:

उक्त मंत्र बोलकर अपने इष्ट को प्रणाम करके इस शिव गायत्री मंत्र का जप करें–

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि, तन्नो रूद्र प्रचोदयात्।।

शिवजी का ध्यान करते हुए प्रार्थना करें- हे भोलेनाथ मेरे सिर से यह ऋण भार उतर जाए. यह कलह कलेश मिट जाए. मैं निर्भार जीवन जी सकूं, भक्ति में आगे बढ़ सकूं. केवल समस्या को याद न करता रहूं.किस राशि के लोग करें किस विधि शिवजी की पूजाः-

भगवान शिव तो सहज प्रसन्न हो जाते हैं. उन्हें तो पंचाक्षर मंत्र ऊं नमः शिवाय का जप करते हुए एक लोटा शुद्ध जल भी चढ़ा दें तो वह प्रसन्न हो जाते हैं और हर प्रकार की कृपा प्रदान करते हैं.

जलाभिषेक ही सर्वोत्तम है परंतु ज्योतिषशास्त्र में विशेष प्रयोजनों और कष्टों के निदान के लिए शिवजी के अभिषेक के लिए राशि अनुसार द्रव्य भी बताए जाते हैं. ये द्रव्य उस राशि को प्रिय रंग से प्रभावित हैं.

राशि के मुताबिक करें पूजाः

मेषः इस राशि के जातकों को जल से महादेव का अभिषेक करना चाहिए.

वृषभः गंगा जल मिश्रित जल अथवा गंगा जल महादेव को करे अर्पित.

मिथुनः भगवान को बेलपत्र जरूर अर्पित करें.

कर्कः दूध से महादेव के शिवलिंग का अभिषेक करें.

सिंहः अनार का रस या जल के साथ रक्त चंदन अर्पित करते हुए महादेव का अभिषेक करें.

कन्याः भगवान शिव को गन्ने के रस से स्नान कराए.

तुलाः इस राशि के जातक चांदी से निर्मित सर्प महादेव को अर्पित करें.

वृश्चिकः लाल वस्त्र अर्पित करें. शिवलंग पर जल चढ़ाकर रक्त चंदन का लेप करें.

धनुः केशर युक्त कच्चा गाय का दूध अर्पित करें.

मकर व कुंभः महादेव का अभिषेक कर थोड़े से काले तिल अर्पित करें.

मीनः पीले पदार्थो का भोग लगाएं. जल के साथ हल्दी का लेप करें.बाधा मुक्ति के लिए शिवपूजा में छोटे-छोटे अचूक विधानः

शिव-पार्वती सर्वसुख प्रदायक हैं. संसार की पीड़ाओं से मुक्ति के लिए शिवजी की आराधना के कुछ सरल उपाय बताए गए हैं.

आइए जानते हैं शिवपुराण कुछ ऐसे ही छोटे और अचूक उपायों के बारे शिवपुराण में भी लिखा है.

ये उपाय इतने सरल हैं कि इन्हें बड़ी ही आसानी से किया जा सकता है. हर समस्या के समाधान के लिए शिव पुराण में अलग उपाय बताया गया है. ये उपाय विधि-विधान पूर्वक करने से भक्तों की हर इच्छा पूरी हो सकती है. ये उपाय इस प्रकार हैं-

शिवपुराण के अनुसार, भगवान शिव को प्रसन्न करने के उपाय इस प्रकार हैं.

1. भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है.

2. तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है.

3. जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है.

4. गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है.
( ये सारे अन्न भगवान को अर्पण करने के बाद गरीबों में बांट देना चाहिए)शिवपुराण के अनुसार, जानिए भगवान शिव को कौन-सा रस (द्रव्य) चढ़ाने से क्या फल मिलता है-

1. बुखार होने पर भगवान शिव को जल चढ़ाने से शीघ्र लाभ मिलता है. सुख व संतान की वृद्धि के लिए भी जल द्वारा शिव की पूजा उत्तम बताई गई है.

2. तेज दिमाग के लिए शक्कर मिला दूध भगवान शिव को चढ़ाएं.

3. शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों की प्राप्ति होती है.

4. शिव को गंगा जल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है.

5. शहद से भगवान शिव का अभिषेक करने से टीबी रोग में आराम मिलता है.

6. यदि शारीरिक रूप से कमजोर कोई व्यक्ति भगवान शिव का अभिषेक गाय के शुद्ध घी से करे तो उसकी कमजोरी दूर हो सकती है.शिवपुराण के अनुसार, किस फूल के चढ़ाने से क्या फल मिलता है-

1.लाल व सफेद आंकड़े के फूल से भगवान शिव का पूजन करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है.

2.चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है.

3.अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने पर मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है.

4. शमी वृक्ष के पत्तों से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है.

5. बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है.

6. जूही के फूल से भगवान शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती.

7. कनेर के फूलों से भगवान शिव का पूजन करने से नए वस्त्र मिलते हैं.

8. हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है.

9. धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है.

10. लाल डंठलवाला धतूरा शिव पूजन में शुभ माना गया है.

क्या आपको यह जानकारी पसंद आई?

ऐसी अनगिनत कथाओं का एक संसार है जहां आप धार्मिक-आध्यात्मिक कथाएं, जीवन को बदलने वाली प्रेरक कथाएं, रामायण-गीता, ज्योतिष और सभी प्रमुख मंत्रों को पढ़ सकते हैं उन मंत्रों के क्या लाभ हैं, उसके बारे में जान सकते हैं.

किसी और के कहने पर विश्वास करने से अच्छा एक बार स्वयं आजमाकर देख लिया जाए. इस लाइन के नीचे प्रभु शरणम् एप्प का लिंक है. उसे क्लिक करके एप्प को देखें फिर निर्णय़ करें. ये एक धार्मिक प्रयास है. एक बार तो इसे देखना ही चाहिए.

पौराणिक कथाएँ, व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र, गीता ज्ञान-अमृत, श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ने के हमारा लोकप्रिय ऐप्प “प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प” डाउनलोड करें.

Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करेंये भी पढ़ें-
शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद खाना चाहिए? स्त्री शिवलिंग स्पर्श कर सकती है?

न मंदिर है पास न पूजा सामग्री, फिर भी विधिवत हो सकती है शिवजी की पूजा.

एकादशी व्रत पूर्णतया वैज्ञानिक हैं. पढ़ें तो गर्व से सीना फूल जाएगा

हम ऐसी कथाएँ देते रहते हैं. फेसबुक पेज लाइक करने से ये कहानियां आप तक हमेशा पहुंचती रहेंगी और आपका आशीर्वाद भी हमें प्राप्त होगा. https://www.facebook.com/PrabhuSharanam कथा पसंद आने पर हमारे फेसबुक पोस्ट से यह कथा जरुर शेयर करें.

धार्मिक चर्चा में भाग लेने के लिए हमारा फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें. https://www.facebook.com/groups/prabhusharnam

error: Content is protected !!