शरद पूर्णिमाः राशि अनुसार छोटे-छोटे उपायों के बड़े-बड़े कमाल

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इस लाइन के नीचे हमारे फेसबुक पेज का लिंक है उसे क्लिक करके लाइक कर लें.इस पोस्ट को पढ़ने से पहले आपके लिए एक चीज समझ लेना जरूरी है कि कई बार सभी उपाय जहां निष्फल हो जाते हैं उस समय दान ही एकमात्र रास्ता बचता है प्रारब्ध यानी पूर्वजन्म के किए कार्यों के दुष्फलों से निदान और निवारण का.
पूजा-पाठ इसमें सहायक होते हैं पर रत्न आदि धारण करने से ज्यादा फलदायी होते हैं दान-पुण्य, प्रेम सद्भाव. कुछ अवसर ऐसे विशेष होते हैं जब इनका प्रभाव अधिक देखने को मिलता है. शरद पूर्णिमा को उनमें से एक माना जाता है.
आज दोपहर से शरद पूर्णिमा लग चुकी है. स्नान-दान की पूर्णिमा तो कल की है किंतु चंद्रपूजन, रात्रिजागरण की पूर्णिमा आज की ही है. खीर आदि का प्रसाद आज ही बनाया जाएगा और दान कल होंगे. इसलिए 15 अक्टूबर और सोलह अक्टूबर दोनों ही दिन इन उपायों के लिए उचित हैं.
इस बार शरद पूर्णिमा पर कई सुंदर योग बने हैं. रवि योग, गजकेशरी योग एवं समसप्तक योग- तीन विशिष्ट योगों के साथ आई है इस बार की शरद पूर्णिमा इसलिए यह विशेष रूप से उत्तम है. इसका लाभ उठा लेना चाहिए.
नए व्यापार की शुरुआत, भूमि, भवन, वाहन, सोना-चांदी की खरीद के लिए अत्यंत शुभ दिन है. वाहन लोहे का होता है और शनिवार को लोहा खरीदकर घर नहीं लाना चाहिए इसलिए वाहन घर लाने से बचें लेकिन उसकी बुकिंग कर सकते हैं.
आज का चंद्रमा पूर्णरूप से सोलह कलाओं से युक्त मनोहर छवि वाला होता है. चंद्रमा मन का कारक है. यदि कुंडली में चंद्रमा अशुभ है तो माता के स्वास्थ्य से परेशानी रहेगी. माता को कष्ट होगा. दुधारू पशुओं की असमय क्षति हो सकती है, दूध आदि के कारोबार में नुकसान हो सकता है.
घर में पानी की कमी होती है, कुँएं नलकूप आदि आश्चर्यजनकरूप से धोखे देते हैं.चंद्रमा मजबूत है तो आपकी कल्पनाशक्ति बहुत अच्छी होगी. निश्चय भी बलवान होगा. धन की कभी कमी नहीं होगी क्योंकि चंद्रमा धनी बनाने पर आ जाए तो गोबर भी चांदी हो जाता है. बिना कठिन प्रयास के धन बरसने लगता है.
तो यदि चंद्रमा शुभफल नहीं दे रहा है तो इसका सबसे सरल उपाय है- माता की सेवा करना. माता की सेवा से चंद्रमा बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं. माता में अपनी माता और सास भी आती हैं. इऩका अपमान होता है तो चंद्रमा रुष्ट होते हैं. माता को भोजन कराने के उपरांत ही भोजन करना आरंभ कर दें.
इस कार्य को एक साल तक आजमा कर देखें. अगले शरद पूर्णिमा पर हम फिर से बात करेंगे. यदि आपको लाभ न हुआ तो कहिएगा.
सेवा भाव से माता की सेवा करें और फिर देखें चमत्कार. चंद्रमा के साथ-साथ शनि भी प्रसन्न हो जाते हैं. यदि दोनों प्रसन्न हो गए तो रंक को राजा बनने में विलंब नहीं होता. इसे एक साल तक धैर्यपूर्वक आजमा कर देखें.
हमारी प्रचलित ज्योतिषीय राशि फलादेश चंद्रराशि आधारित भी है. इसलिए ज्योतिषी जन पूर्णिमा और विशेष रूप से शरद पूर्णिमा को विशेष प्रभावी मानते हैं.
ऐसा माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की किरणों के साथ स्वर्ग में रखी अमृत की बूंदे भी गिरती हैं. आज चंद्रमा की किरणों अमृतवर्षा करती हैं जिसके प्रभाव से कई छोटी-बड़ी बीमारियों में लाभ होता है.
इस शरद पूर्णिमा की रात घरों की छतों पर कुछ पहर तक दूध से बनी खीर रखने का विधान है. पृथ्वी पर दूध को ही अमृत का प्रतीक माना गया है. इसके अलावा दूध का रंग श्वेत है जो चंद्रमा का रंग भी है. इन कारणों से भी खीर और शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व हो जाता है.
चंद्रमा का प्रभाव विभिन्न राशियों पर अलग-अलग पड़ता है. चंद्रमा की गति सर्वाधिक तीव्र है. एक राशि से दूसरे राशि तक विचरण करने में चंद्रमा को करीब ढ़ाई दिन लगते हैं. यानी यदि चंद्रमा का दोष दूर कर लिया जाए तो जीवन की बहुत सी छोटी-बडी परेशानियां स्वतः ठीक हो जाएं.
आइए देखते हैं कि शरद पूर्णिमा के दिन ज्योतिषशास्त्री राशि अनुसार क्या सरल उपाय सुझाते हैं. ये उपाय आजमाए हुए उपाय हैं और इनका लाभ अवश्य होता है. आगले पेज पर जानिए किस राशि के लोगों को करना चाहिए कौन सा सरल उपायः
सूचनाः
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शरद पूर्णिमा पर मेष राशि के लोगों को कन्याओं को खीर भेंट करना चाहिए और चावल को दूध में धोकर बहते पानी में प्रवाहित करना चाहिए. इससे चंद्रदोष दूर होता है. माता की सेवा करें. उनके लिए कोई उपहार लें.
वृषः
इस राशि में चंद्रमा उच्च का होता है. वृष राशि का स्वामी शुक्र है. शुक्र का रंग भी श्वेत है. शुक्र प्रसन्न हों तो सभी भौतिक सुख-सुविधाएं सरलता से प्राप्त होती हैं. तो शुक्र को प्रसन्न करने के लिए दही और गाय का घी मंदिर में दीपक आदि जलाने के लिए दान कर दें. विवाह में बाधाएं हैं या दांपत्य जीवन में परेशानी है तो मंदिर में या गरीबों को चावल, चीनी आदि दान कर सकते हैं. माता के लिए चांदी का कोई उपहार लें.
मिथुनः
इस राशि का स्वामी बुध, चंद्र के साथ मिल कर व्यापारिक एवं कार्य क्षेत्र के निर्णयों को प्रभावित करता है. यदि चंद्रमा को उत्तम कर लिया तो सही निर्णय लेने की क्षमता में महारथ आएगी और सारे काम बनते चले जाएंगे. आप दूध और चावल का दान करें तो उत्तम रहेगा. बुध का रंग हरा है. इसलिए खीर में ईलायची आदि का प्रयोग करें.
कर्कः
चंद्रमा तो इस राशि का स्वामी भी है इसलिए आपको तनाव मुक्त और प्रसन्न रहने के लिए मिश्री मिला हुआ दूध मंदिर में दान देना चाहिए. चंद्रमा की शीतल किरणों का आज रात्रि सेवन करें. कुछ देर तक खुले में बैठें और शीतलता का आनंद लें.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.सिंहः
आपका राशि स्वामी सूर्य है. सूर्य का रंग है लाल. इसलिए शरद पूर्णिमा के अवसर पर धन प्राप्ति के लिए मंदिर में गुड़ का दान करें तो आपकी आर्थिक स्थिति में परिवर्तन हो सकता है. अभी आपकी राशि में राहु है इसलिए आज की रात्रि आटे की गोलियां किसी तालाब-नदी आदि में मछलियों को खाने के लिए जरूर दें. इसका आपके करियर, पढ़ाई, बिजनेस आदि पर बहुत सकारात्मक प्रभाव दिखेगा.
कन्याः
बृहस्पति अभी कन्या राशि में है. इस पवित्र पर्व पर आपको केसर मिली हुई खीर बनानी चाहिए. 3 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को भोजन में खीर खिलाना विशेष लाभदाई रहेगा. गरीबों को भी खीर खिलाएं आपके लिए बहुत शुभ रहेगा.
तुलाः
इस राशि का स्वामी है शुक्र. शुक्र का रंग है सफेद. इसलिए इस राशि के लोग धन और ऐश्वर्य के लिए धर्म स्थानों यानी मंदिरों पर दूध, चावल व शुद्ध घी का दान दें. ब्राह्मणों को भी खीर दान करें.
वृश्चिकः
इस राशि का स्वामी है मंगल और इसमें चंद्रमा नीच का होता है. शुक्र और शनि दोनों अभी इसी राशि में हैं. इसलिए गरीबों, मजदूरों के प्रति विशेष प्रेमभाव रखें. घर में काम करने वाले नौकरों, रिक्शेवालों, मजदूरों, गार्ड आदि को यदि संभव हो तो गुड़ की खीर खिलाएं या उन्हें लाल व सफेद रंग की कोई वस्तु दान करें. आपकी साढ़ेसाती भी चल रही है. ये उपाय आपके लिए बहुत शुभकारी होगा. आप बहते पानी में चावल भी प्रवाहित कर सकते हैं. इस उपाय से भी आपको लाभ हो सकता है.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.धनुः
इस राशि का स्वामी गुरु है. राशि में गोचर से अभी मंगल है. इसलिए धनु राशि वालों को शरद पूर्णिमा के अवसर पर गुड की बनी खीर या गुड व चावल दान करना चाहिए. संभव हो तो लालवस्त्र जैसे तौलिया या टीशर्ट या रूमाल आदि भी दान करें. इस दान का पूरा फल मिलेगा. चने की दाल पीले कपड़े में रख कर मंदिर में भी दान कर सकते हैंं.
मकरः
इस राशि का स्वामी शनि है. राशि पर शनि की तीसरी दृष्टि है. राशि स्वामी शनि शुक्र के साथ मित्रगृही होकर ग्यारहवें भाव में बैठा है. यह आपके लिए धनलाभ कराएगा. साथ ही बृहस्पति की पांचवी दृष्टि भी राशि पर पड़ रही है इसलिए केसर मिश्रित खीर बनाएं. स्वयं भी खाएं, ब्राह्मणों व निर्धनों को खिलाएं एवं गाय को भी दें. यह आपके लिए शुभफलदायी होगा.
कुंभः
इस राशि का स्वामी शनि है. अभी गोचर से केतु कुंभ राशि में है और राहु की सातवीं पूर्ण दृष्टि है. इसलिए गरीबों की सेवा करें, उन्हें भोजन कराएं. कहीं कोई दृष्टिहीन है तो उसे आज भरपेट भोजन जरूर करा दें. घर के सभी बड़ों की सेवा करें. संभव हो तो उनके लिए कुछ उपहार लेकर जाएं. राहु-केतु बड़े मूडी ग्रह हैं. यदि ये शुभ फल देने पर आ जाते हैं तो इनका कोई मुकाबला नहीं है.
मीनः
शरद पूर्णिमा के अवसर पर आपकी राशि में पूर्ण चंद्रोदय होगा. गोचर से चंद्रमा अभी मीन राशि में है. इसलिए आप सुख, ऐश्वर्य और धन की प्राप्ति के लिए ब्राह्मणों या निर्धनों को खीर का भोजन करवाएं, उन्हें दूध, चावल और शक्कर दान करें. बहुत लाभ होगा. बिजनेस व्यापार में बाधा आ रही हो तो निर्धनों के प्रति आदर भाव रखना शुरू करें, लाभ होगा.
(यह पोस्ट ज्योतिषशास्त्र की प्रचलित मान्यताओं पर आधारित है और अवश्य लाभ देते हैं)
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