लक्ष्मी कथा : इस तरह राजा नल को सबक सिखाया मां संपदा ने
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iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करेंनल मशहूर और खूब संपन्न राजा थे. एक बार उनकी पत्नी दमयंती ने अपनी खास सेविका को गले में गाँठ लगा पीला डोरा बाँधे देखा. दमयंती ने पूछा तो उसने उत्तर दिया,यह मां सम्पदा का डोरा है.
दमयंती ने पूछा इससे क्या होता है. सेविका ने कहा, इसे पहनने से घर में सुख सम्पत्ति आती है और पहले से हो तो और भी बढ जाती है. रानी को अच्छा लगा. एक डोरा लेकर 16 गांठे दे कर अपने गले में बाँध लिया.
रात में राजा नल ने दमयंती से गले के पीले डोरे के बारे में पूछा तो रानी ने सारी बातें बता दीं. इस पर नल ने कहा, हमें किस बात की कमी है और उस डोरे को तोड कर फेंकने के बाद चैन से सो रहा.
कुछ देर बाद राजा को सपने में एक औरत दिखी जो कह रही थी- ” मैं जा रही हूँ. उसी समय एक दूसरी औरत भी वहां आ गयी बोली मैं आ रही हूँ. नल को यही सपना बारह दिन तक रोज आता रहा तो वह उदास रहने लगा.दमयंती ने पूछा कि उदास क्यों हैं तो राजा ने कहा, समझ में नहीं आता वे दोनों औरतें कौन हैं. अगली बार राजा ने उन दोनों का नाम पूछा तो पहली बोली मैं लक्ष्मी हूँ और दूसरी ने अपना नाम दरिद्रा बताया. जल्द ही राजा नल को पता चला कि पखवारे भर के भीतर उनका सब धन जाता रहा है.
वे इतने गरीब हो गये कि खाने तक को न रहा. वे जंगल में कन्द मूल खाकर रहने लगे. एक दिन उनके पाँच बरस के बेटे को भूख लगी तो दमयंती ने नल से मालिन के यहाँ से छाछ माँगकर लाने को कहा. मालिन ने राजा को छाछ देने से मना कर दिया.
एक दिन जंगल में बेटे को सांप ने डस लिया. वे पुत्ररत्न खो कर दुःखी थे कि राजा नहा कर धोती सुखा रहा था तभी तेज हवा धोती उडा ले गई. रानी ने अपनी आधी साड़ी फाड़ कर नल को दी. बाद में राजा खाने के दो तीतर मार लाया, रानी ने तीतर भूने तो भुने तीतर उड गये.
वे भूखे प्यासे आगे बढे तो रास्ते में राजा के दोस्त का घर पडा. उसने दोनों को जिस कमरे में ठहराया था वहाँ रखे लोहे के औजार और सामान धरती में समा गए. चोरी का इल्जाम लगने के डर से वे वहां से भाग गये.आगे चलकर राजा की बहन का घर पडा. राजा की बहन ने पुराने महल में ठहराया और सोने के थाल में उन्हें खाना भेजा तो थाल मिट्टी की परात में बदल गया. परात को जमीन में गाडकर वे फिर भाग निकले.
रास्ते में एक साहूकार का घर आया. साहूकार ने नल और दमयंती के ठहरने की व्यवस्था जिस हवेली में की वहाँ खूंटी पर हीरों का हार टंगा था. पास ही दीवार पर मोर का चित्र बना था. देखते ही देखते मोर हार को निगलने लगा. यह अचरज देखकर वे वहाँ से भी चोरी के डर से भाग चले
दमयंती ने सलाह दी कि शहर की ओर भागने से बेहतर है जंगल में कुटिया बनाकर रहा जाये. वे जंगल में तो नहीं गये पर एक सूखे बगीचे में रहने लगे. दोनो बगीचे को सींचते और देख रेख करते.
दोनों की मेहनत से वह बगीचा हरा भरा हो गया तो एक दिन बगीचे का मालिक वहाँ आया और खुश हो कर पूछा तुम दोनों कौन हो. नल और दमयंती ने कहा हम मुसाफिर हैं. नौकरी खोजते हैं. बाग़ के मालिक ने उन्हें अपने यहां नौकर रख लिया.एक दिन बाग की मालकिन ने सम्पदा देवी की कथा करवायी. सबको बुलवाया. दमयंती भी गयी थी उसने भी कथा सुनकर सम्पदा देवी का डोरा ले लिया. राजा ने रानी से फिर पूछा ये कैसा डोरा पहना है?
दमयंती बोली यह वही डोरा है जिसे आपने एक बार तोडकर फेंक दिया था. हमें इतनी विपत्तियाँ झेलनी पडी. सम्पदा देवी हम पर नाराज हो गयीं. दमयंती ने कहा, यदि सम्पदा माता सच्ची हैं तो हमारे दिन फिर से लौट आएगे.
उसी रात नल ने सपना देखा. एक स्त्री कह रही हैं मैं जा रही हूँ, दूसरी स्त्री मैं आ रही हूँ. राजा के पूछने पर पहली औरत ने अपना नाम दरिद्रा तो दूसरी ने लक्ष्मी बताया. राजा ने लक्ष्मी से पूछा अब तो नहीं जाओगी.
लक्ष्मी बोली यदि तुम्हारी पत्नी सम्पदा का डोरा लेकर कथा सनती रहेगी तो कभी नही पर तुम डोरा तोड दोगे तो चली जाऊँगी. उधर बाग की मालकिन किसी रानी को हार देने जाती थी उस हार को दमयन्ती गूंथती थी.
रानी को दमयंती का बनाया हार बहुत पसंद आया. रानी के पूछने पर बाग़ की मालकिन ने बताया कि उसकी नौकरानी ने बनाया है. रानी ने बाग की मालकिन से दोनों के नाम पूछने को कहा. उसने नाम पूछे तो पता चला कि वे नल दमयंती हैं. बाग का मालिक ने उन्हें आदर सहित कुछ धन दिया और उनसे क्षमा माँगने लगा.अब नौकरी न हो सकती थी, सो दोनों अपने राजमहल की तरफ चले. रास्ते में साहूकार का घर आया. यहाँ वे उसी कमरे में ठहरे तो देखा कि दीवार पर बना मोर नौलखा हार उगल रहा है. साहूकार ने यह चमत्कार देख राजा के पैर पकड लिये और खूब सारा धन भेंट किया.
आगे चलने पर बहन के घर आया. नल उसी पुराने महल में ठहरा जहां मिट्टी की परात दबायी थी. वह जगह खोदी तो हीरे जड़ा थाल निकला. राजा ने बहन को बहुत सा धन भेंट में दे आगे चल दिया.
इसके बाद नल दमयंती मित्र के घर पहुँचे और उसी कमरे में ठहरे जिसमें पहले रुके थे. मित्र के लोहे के औजार और सब सामान सही सलामत मिल गये. उसने उपहार दे विदा किया.
आगे चलने पर उसकी धोती एक पेड़ पर उलझी हुई मिल गयी. तो राजकुमार जिसको ने सांप ने डस लिया था उसी के साथ खेलता हुआ मिल गया.
अपने महलों में पहुचने पर दमयंती की सखियों ने मंगल गान गाया और नल का उसके मंत्रियों और अधिकारियों ने जी खोल कर स्वागत किया. संपदाजी ने उनके बुरे दिन अच्छे दिनों में बदल दिये.
स्रोत : पारंपरिक लोककथाएं
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