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बुध ग्रह की पत्नी को पार्वती का शाप, एक माह पुरुष तो एक माह रहेगी स्त्री बनकर- मनुपुत्री इला की करुण कथा

बुध ग्रह की पत्नी को पार्वती का शाप, एक माह पुरुष तो एक माह रहेगी स्त्री बनकर- मनुपुत्री इला की करुण कथा

Shiva kajri teej
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हमने कुछ समय पहले आपको चंद्रमा के पुत्र बुध की उत्पत्ति की कथा बताई थी. बुध के जन्म को लेकर हुए विवाद से बुध बड़ी ग्लानि महसूस करते थे.

श्रीविष्णु ने उन्हें उड़ने की शक्ति और कई वरदान दिए. अपने जन्म की कथा से व्यथित बुध का पारिवारिक जीवन से भरोसा उठ गया था. वह ब्रह्मचर्य का प्रयोग करते थे.

ब्रह्मा के पुत्र वैवस्वत मनु को आदिशक्ति से मैथुनी सृष्टि की रचना का आदेश मिला था. संतान की प्राप्ति के लिए मनु और श्रद्धा ने पुत्र कामेष्टि यज्ञ कराया.

पुत्र कामना से मित्र वरूण देवों को जो हविष अर्पित किया गया उस दौरान चूक हो गई. इस कारण मित्र वरुण ने पुत्र का लिंग परिवर्तित कर उसे पुत्री बना दिया.

इस तरह इला श्रद्धा के गर्भ में आ गईं. पति-पत्नी ने मित्र वरुण से क्षमा याचना की और यज्ञ से प्रसन्न कर उनसे गर्भस्थ शिशु का लिंग परिवर्तित कराया.

इस तरह बालक पुत्री इला का जन्म पुत्र सुदुयम्न के रूप में हुआ. सुदुयम्न एक दिन शिकार के पीछे भागता सरवन वन में उस स्थान तक चला गया जो देवी पार्वती ने संसार से गोपनीय रखा था.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.उस वन में देवी की माया से शिव के अतिरिक्त कोई और पुरुष प्रवेश नहीं करता था. यदि चूक से भी कोई पुरुष प्रवेश कर जाए तो वह देवी के शाप से स्त्री बन जाता था.

कई पुराणों में कहा गया है कि स्वयं महादेव भी देवी को प्रसन्न करने के लिए वहां आने पर स्त्रीरूप धारण कर लेते थे. शाप से सुदुयम्न स्त्री बनकर भटकने लगा.

वह इस स्वरूप से बहुत दुखी था. उसने शिव और पार्वती से बार-बार क्षमा मांगी और उसे पुरुष बनाने की विनती की. महादेव ने बताया कि यह अनायास नहीं हुआ.

उसके पिता द्वारा देवों पर दबाव बनाकर विधि के विधान से खिलवाड़ कर उसे स्त्री से पुरुष बनाने की चेष्टा का परिणाम है.

सुदम्य ने देवी पार्वती से कहा कि उसके माता-पिता के कार्यों के लिए उसे दंडित करना उचित नहीं है. देवी दयालु हो गईं.

पार्वती ने कहा शाप बदल नहीं सकता लेकिन यदि वह चाहे तो उसे एक ऐसा वरदान दे सकती हैं जिसके प्रभाव से वह एक महीने पुरुष और एक महीने स्त्री रूप में रह सकता है.

शिव ने वरदान दिया कि सुदुयम्न को पुरुष जीवन की बातें स्त्री रूप में स्त्री जीवन की बातें पुरुष रूप में याद नहीं रहेंगी ताकि उसे स्वयं पर लज्जा महसूस न हो.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.सुदुयम्न स्त्री रूप में इला हो गया और वन में भटकने लगा. इला पर बुध की नजर पड़ी और वह मोहित हो गए. उन्होंने इला से विवाह की इच्छा प्रकट की.

इला भी अद्वितीय सुंदर पुरुष बुध पर रीझ गई. बुध और इला का विवाह हो गया. अगले ही महीने इला सुदुयम्न बनकर जाने लगी.

बुध विवेक के भी देवता हैं. वह पुरूष रूप धारण करने के बाद इला को ज्ञान देते ताकि उसे किसी स्त्री की इच्छा न हो.

इला एक वर्ष बुध के साथ रही और उसने पुरूरवा को जन्म दिया जिसने चंद्रवंश चलाया. उसी कुल में यदु ने यदुवंश चलाया जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया.

उसके बाद सुदुयम्न ने शिव की घोर तपस्या की. अश्वमेध करके देवों को प्रसन्न किया और फिर से पुरुष रूप प्राप्त कर लिया.

बुध की पत्नी इला के जन्म की यह कथा कई पुराणों में आई है. बस इला के जन्म पूर्व लिंग बदलने के कारण में भिन्नता आती है.

संकलन व प्रबंधन: प्रभु शरणम् मंडली

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