March 12, 2026

जानिये किसके अभाव में आप का ज्ञान व्यर्थ है.

Maa-saraswati-photo
अब आप बिना इन्टरनेट के व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र , श्रीराम शलाका प्रश्नावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ तथा उपयोग कर सकते हैं.इसके लिए डाउनलोड करें प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें

रौबदार व्यक्तित्व का एक युवक संत कबीर के पास आया. कबीर उस समय आंखें मूंदे भक्ति भजन में मगन थे. उनके साथ कई और लोग सत्संग कीर्तन में डूबे थे.

युवक बोला- गुरुजी! मैंने उच्च शिक्षा ली, पर्याप्त ज्ञान ग्रहण किया. विवेकशील हूं. अच्छे-बुरे का फर्क समझ सकता हूं. फिर भी मेरे माता-पिता मुझे सत्संग जाने को कहते हैं. इतना ज्ञानवान हो जाने पर मुझे रोज सत्संग की क्या जरूरत है?

कबीरदासजी उस युवक की बात सुनते रहे और मंद-मंद मुस्कुराते रहे. युवक को लगा कि शायद अपना परिचय देने में कुछ कमी रह गई. कुछ और बताना चाहिए
शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

See also  परहित सरिस धर्म नहीं भाई, पूजा-पाठ न करके भी एक राजा ईश्वर के परमप्रिय भक्तों में शामिल थाःप्रेरक कथा
Share: