क्रूर नहीं बल्कि कर्मों का हिसाब करने वाले हैं शनिदेव

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भोलेनाथ ने शनिदेव को ग्रहों के बीच दंडाधिकारी यानी जज बनाया है. जज तो निर्णय कर्मों के आधार पर ही करेगा. हां इतना जरूर है कि अपने अच्छे बर्ताव से जज को प्रसन्न किया जा सकता है ताकि गलत कर्मों का दंड अधिक न मिले.
शनिदेव 14 साल की आयु से पहले किसी पर आते नहीं. वह मनुष्य के कर्मों का हिसाब उसी जन्म में करते हैं. सात साल के लिए जब वह आते हैं तो आपके समस्त कर्मों का बही-खाता खोलते हैं और उसके अनुरूप फल देते हैं.
कितनी व्यावहारिक व्यवस्था है यह. शनि आते समय और जाते समय दोनों ही स्थितियों में आपके लिए काफी अच्छे संयोग पैदा करते हैं. यह एक संकेत है कि अपने कर्मों को सही रखना. मैं जब पुनः आउंगा तो तुम्हारे कर्मों का फल दूंगा.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.इसलिए साढ़े साती का आना और जाना दोनों एक संकेत हैं. कर्म कैसे करेंगे यह आप पर हैं, फल क्या मिलेगा वह शनि तय करेंगे. इसलिए जाते समय वह आपको स्मरण कराकर जाते हैं कि यदि अब भी सुधार नहीं हुआ तो दंड और कड़ा मिलेगा.
खैर, आज शनिदेव को प्रसन्न करने का दिवस है. उन्हें प्रसन्न करने के कई सरल उपाय हैं. जैसे काली वस्तुएं दान करना, पीपल के नीचे दीपक जलाना और शनि आराधना करना. आज शनिदेव की महिमा सुनें और दूसरों को भी सुनानी चाहिए.
हम आज आपको बताते हैं सरल उपाय-
कोई भी काला वस्त्र धारण कर लें. पीपल के वृक्ष को प्रणाम करें. तेल या लोहा दान कर सकते हैं. कुछ नहीं तो कम से कम सिक्का ही दान कर दें.
महाराज दशरथ ने शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए शनिस्तोत्र रचा था. उसका कम से कम 11 बार पाठ करें. यह आपके एप्प में है.
साढ़ेसाती या ढैय्या के प्रभाव वाले लोगों को आज मंदिर अवश्य जाना है. वहां पर पीपल वृक्ष के पास या शनिप्रतिमा के सामने 108 बार “ॐ प्रां प्रीं प्रौं शं शनैश्चराय नम:” मंत्र का जाप करना चाहिए.
संभव हो तो सरसो का तेल, उडद, काले तिल, कुलथी, गुड, शनिदेव पर अर्पित कर दें. नहीं भी कर पा रहे हैं तो शनिदेव का ध्यान करके शनिमंत्र तो जप ही लें.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.इसके अलावा शनि महात्मय का श्रवण करें, दूसरों को सुनाएं. शनिदेव ने हनुमानजी को वचन दिया था कि वह उनके भक्तों को पीड़ित नहीं करेंगे. इसलिए आपकी आराधना बिना हनुमत आराधना के पूरी नहीं होगी.
हनुमान चालीसा का पाठ करें. जिनके पास समय हो और कर सकते हों वे सुंदर कांड का पाठ यदि एक बार कर लें तो और उत्तम है, अन्यथा हनुमान चालीसा और बजरंग बाण तो पढ़ ही लें. आपके एप्प में यह सब मौजूद है.
यदि आप यात्रा में हैं और मंदिर जाना संभव नहीं है तो भी ऊपर बताए गए पाठ तो यात्रा में भी कर सकते हैं. उससे पहले पावित्रीकरण मंत्र पढ़ते हुए शरीर पर जल छिड़ककर शुद्ध हो लें.
यात्रा में आपको शनिस्तोत्र, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण के साथ-साथ नवाक्षरी मंत्र का जाप करें तो विशेष लाभकारी होगा. मंत्र इस प्रकार हैः
“कोणस्थ: पिंगलो बभ्रु: कृष्णौ रौद्रोंतको यम:।
सौरी: शनिश्चरो मंद:पिप्पलादेन संस्तुत:।।”
प्रभु शरणम्
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