श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधिः संपूर्ण और शॉर्टकट दोनों
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधिः लघु पाठ, वाकार विधि और सरल विकल्प
नवरात्रि में माता का हर भक्त श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करने की लालसा रखता है. बहुत से लोग करते भी हैं. कई लोग अज्ञानता में विधियों का ध्यान नहीं रख पाते और पूर्ण फल से वंचित रह जाते हैं.
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधि कई कही गई हैं. सप्तशती के अलावा भी कुछ विकल्प हैं जिनका पाठ भी पूरे दुर्गा सप्तशती के पाठ के बराबर फलदायी होता है.
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कई लोगों के साथ समय का अभाव रहता है या कोई अन्य कारण जिससे वे लंबी पूजा नहीं कर पाते. शास्त्रों में उनके लिए भी कई उपाय बताए गए हैं. बस जरूरत है आपको श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधि जानने की.

श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ कितने दिन में खत्म करना चाहिए?
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ भक्त अपनी सुविधा और समयानुसार मुख्य रूप से 3 तरीकों से पूरा कर सकते हैं.
सप्तशती पाठ की तीन विधियां हैं. इस पोस्ट में आपको तीनों विधियों की पूरी जानकारी Step-by-Step मिलेगी. आप धैर्यपूर्वक पोस्ट पढ़ें.
आइए जानते हैं जितनी भी श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधि हैं, उनके बारे मेंः
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1 दिन में: साधकगण प्रतिदिन सभी 13 अध्यायों का एक संपूर्ण पाठ करते हैं. इसमें कई घंटे लगते हैं लेकिन जो साधना करते हैं और जिनके पास समय है उन्हें इसी विधि का पालन करना चाहिए. इसके थोड़े विधि-विधान हैं जिसको सरल रूप में नीचे दिया गया है.
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7 दिनों में (वाकार विधि): ऐसे साधक जिन्होंने व्रत रखा है और जो कम से कम नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पूरा पाठ करने की लालसा रखते हैं लेकिन समय की कमी है तो वे 7 दिनों में पाठ कर सकते हैं.
सात दिनों में पूरी सप्तशती के पाठ का एक विशेष क्रम है. इसे वाकार विधि कहते हैं। नीचे आपको इस पर पढ़ने को मिलेगा कि किस दिन कौन से अध्याय का पाठ करते हुए सात दिनों में 13 अध्याय पूरे किए जाते हैं.
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लघुपाठ: ऐसे साधक जो नवरात्रि में संपूर्ण 13 अध्यायों के प्रतिदिन पाठ के लिए समय नहीं निकाल सकते या शारीरिक विवशता के कारण लंबा नहीं बैठ सकते वे लघु पाठ कर सकते हैं।
सप्तशती के सभी तेरह अध्यायों को तीन हिस्से में बांटा गया है. कामकाजी और नौकरीपेशा जन इस विधि को अपना सकते हैं. लघुपाठ विधि का क्रम भी विस्तार से आप नीचे पढ़ सकते हैं.
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समय का अभाव होने पर शॉर्टकट: श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण है. यदि समय बहुत कम है तो केवल कवच, अर्गला, कीलक और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें; यह भी संपूर्ण पाठ के समान फलदायी माना गया है.
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नौकरीपेशा लोगों के लिए सबसे सरल विकल्पः बहुत से ऐसे नौकरीपेशा लोग हैं जिनके पास समय का एकदम अभाव है। वे प्रतिदिन अधिक से अधिक आधे घंटे का समय ही निकाल सकते हैं उनके लिए भी एक तरीका हैः सिद्ध कुंजिका स्तोत्र और सप्तश्लोकी दुर्गा पाठ ।
आपकी सुविधा के लिए इसे भी हमने विस्तार से नीचे बताया है।
माँ के भक्तों से विनतीः हमने बहुत परिश्रम से मां दुर्गा के भक्तों के लिए श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधि की यह पोस्ट तैयार की है. यदि आपको यह पोस्ट जरा सी भी उपयोगी लगे तो पढ़ने के बाद इसका लिंक शेयर जरूर करें माता भक्तों के साथ. आपका यह सहयोग हमारे लिए माता के प्रसाद जैसा होगा.
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधिः 9 दिनों का संपूर्ण पाठ
हमने आपको ऊपर कई विधियों के बारे में बताया. पोस्ट की शुरुआत सबसे पहले विस्तृत विधि से करते हैं. यह ऐसे साधकों के लिए है जो पूरे विधि-विधान से श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के इच्छुक हैं.
नवरात्रि के 9 दिनों में सप्तशती पाठ यह लंबी विधि श्री दुर्गा सप्तशती ग्रंथ में और विस्तार से बताई गई है. अधिक विस्तार से जानने के लिए श्री दुर्गा सप्तशती पुस्तक देखें.
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधिः पहला चरण
पाठ आरंभ करने से पूर्व श्री गणेश जी, शिव जी, माता जगदंबा, श्री विष्णु आदि देवताओं का स्मरण एवं पूजा कर लेनी चाहिए. गणेशजी का आह्वान तो हर पूजन से पूर्व किया ही जाता है.
यदि आप गणेशजी का आह्वान विधिवत करना चाहते हैं जो कि करना चाहिए तो इसके लिए प्रभु शरणम् ऐप्प के दैनिक पूजन मंत्र सेक्शन में देखें. वहां सरलतम विधि मिल जाएगी. नवरात्रि में यदि आप व्रत रखते हैं तो पूजन विधिवत क्यों न हो.

गणेश जी का आह्वान और पुस्तक पूजन
श्री गणेश जी का आह्वान पूजन कर लें. यदि आप विधिवत नहीं कर पा रहे किसी कारण तो आप कम से कम एक माला ऊँ गं गणपत्यै नमः मंत्र की जप लें.
फिर हाथ जोड़कर गणेशजी का ध्यान करें और उनसे प्रार्थना करेंः
हे मंगलमूर्ति बिना आपके आशीर्वाद के कोई भी पूजन या मंगलकार्य संभव ही नहीं. मैं अज्ञान अबोध हूं. मुझसे कई अपराध हुए हैं. मैं ज्ञात-अज्ञात विधियों से विमुख हूं. इसके लिए क्षमा करेंगे. मैं आपका शरणागत हूं. आपका शरणागत होकर आपकी मैं मां जगदंबा की प्रसन्नता के लिए यह पूजन कर रहा हूं. हे विघ्नहर्ता आप सदैव मेरे साथ उपस्थित रहें. इस पूजन में आने वाले विघ्नों का नाश करें. मां जगदंबा का पूजन निर्विघ्न कर सकूं इसके लिए मुझे आशीर्वाद दें.
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधिः दूसरा चरण
गणेश जी की पूजा के बाद श्री दुर्गा सप्तशती पुस्तक का पंचोपचार पूजन करना चाहिए.
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ जिस पुस्तक से करते हैं सर्वप्रथम उस ग्रंथ को पूजन कर उन्हें संतुष्ट कर लेना चाहिए. इसके बिना किया श्री दुर्गा सप्तशती पाठ अपूर्ण है.
श्री दुर्गा सप्तशती पुस्तक के पंचोपचार पूजन की सरल विधिः
पुस्तक के पूजन के लिए उन पर जल छिड़कर स्नान भाव से स्नान कराएं. फिर धूप-दीप पुष्प आदि समर्पित करें.
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ करते समय पुस्तक को भगवती दुर्गा का ही स्वरूप मानना चाहिए. इस पुस्तक का पाठ करने से पूर्व निम्न मंत्र द्वारा पंचोपचारपूजन करें. पंचोपचार पूजन क्या होता है यह आपको बहुत बार बता चुका हूं.
आप ऐप्प के दैनिक पूजन सेक्शन में जरूर देखिए. पंचोपचार पूजन में मुश्किल से एक से डेढ़ मिनट लगते हैं तो फिर क्यों न किया जाए.
श्री दुर्गा सप्तशती पुस्तक पूजन का मंत्रः
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:।
नम: प्रकृत्यै भद्रायैनियता:प्रणता:स्मताम्॥
सरल हिंदी अर्थ:
“देवी (मां जगदंबा) को नमस्कार है, महादेवी को नमस्कार है। सबका कल्याण करने वाली शिवा को हमारा निरंतर नमस्कार है।
सृष्टि की मूल प्रकृति और मंगल दायिनी भगवती को नमस्कार है। हम नियमपूर्वक विनीत भाव से सदा उन्हें प्रणाम करते हैं।”
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधिः तीसरा चरण

श्री दुर्गा सप्तशती पाठ के लिए ग्रंथ पूजन के बाद साधकों को तीसरे चरण में तीन और पाठ अनिवार्य कहे गए हैं: –
- श्री देवी कवच
- श्री अर्गला स्तोत्रम्
- श्री कीलक स्तोत्र
इन तीनों का पाठ जरूर कर लेना चाहिए. उसके बाद माता के सिद्ध मंत्र नवार्ण मंत्र की एक माला जप लेनी चाहिए।
माता का सिद्ध मंत्र नवार्ण मंत्र हैः
ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै।
नवार्ण मंत्र माता का बड़ा चमत्कारी मंत्र है. इसके नवार्ण होने का कारण और महत्व भी जानना चाहिए.
यदि आपको नवार्ण मंत्र के बारे में और जानना है तो नीचे इस पोस्ट को पढ़ें. आखिर इस मंत्र को मंत्रों का पावरहाउस क्यों कहा जाता है- जानना ही चाहिए.
जगदंबा का सबसे शक्तिशाली मंत्र
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधिः चौथा चरण
कवच, कीलक और अर्गला के बाद श्री दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों का पाठ करना चाहिए.
पाठ पूरा होने के बाद देवी सूक्त और रात्रि सूक्त के पाठ का भी विधान है.
इसके बाद अपराध क्षमा प्रार्थना और दुर्गा माता की आरती अवश्य करें.
इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर लेना चाहिए।
लेकिन जैसा कि पहले भी बताया यह सारी प्रक्रिया साधकों के लिए है. आम भक्त कुछ चीजों को छोड़ सकते हैं.
चलिए आम भक्तों के लिए थोड़ी सरल विधि भी जान लेते हैं. आशा है आपको पोस्ट समझ आ रही होगी और पसंद भी. सरल शब्दों में स्टेप-बाय-स्टेप अब शॉर्टकट विधियों को भी जान लेते हैं.
आमभक्तों के लिए श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की थोड़ी सरल विधिः
साधकों के लिए ऊपर विस्तृत विधि बताई गई. आम भक्त अपनी पूजा का क्रम थोड़ा शॉर्ट रखते हुए निम्न का पालन कर सकते हैं. यह विधि पूरे दिन नौ दिन अपनाई जा सकती हैः
- श्री गणेश जी, शिव-पार्वती, श्रीहरि का अपनी विधि से स्मरण करें. आप उनके कोई मंत्र पढ़कर प्रणाम कर लें या जैसे भी आप प्रतिदिन करते हों.
- उसके बाद नवार्ण मंत्र का 11 या 21 बार जप करें.
- उसके बाद कवच, अर्गला और कीलक का पाठ करें.
- फिर सप्तशती पाठ आरंभ कर सकते हैं.
- क्षमा प्रार्थना करें.
- आरती करें
- प्रसाद ग्रहण करें.
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधिः सरल वैकल्पिक विधियाँ
जो लोग समय के अभाव या किसी अन्य कारण से एक दिन में श्री दुर्गा सप्तशती का संपूर्ण पाठ करने में सक्षम नहीं हैं उनके लिए कुछ वैकल्पिक तरीके भी बताए गए हैं.
ऐसे भक्तों के लिए कई विकल्प हैं. लघु पाठ या वाकार विधि या फिर सप्तश्लोकी और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ.
पहले लघु पाठ जानते हैं, उसके बाद जानेंगे वाकार विधि.
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधिः लघुपाठ या शॉर्टकट तरीका
प्रसंग भेद के आधार पर श्री दुर्गा सप्तशती के तेरह अध्यायों को तीन चरित में बांटा जाता है.
- प्रथम चरित,
- द्वितीय चरित और
- तृतीय चरित.
चरित का क्रमः
प्रथम चरित्र के अंतर्गत केवल प्रथम अध्याय को माना जाता है.
द्वितीय चरित में दूसरा, तीसरा एवं चौथा अध्याय शामिल है.
तृतीय चरित में पांचवें से तेरहवें अध्याय माने जाते हैं.
नियम के अनुसार तीनों चरितों के पाठ का महात्म्य है. परंतु समय के अभाव में द्वितीय चरित का पाठ भी किया जा सकता है. इसे लघु पाठ कहते हैं.
जो लोग तीनों चरित का पाठ नहीं कर पाते वे कम से कम लघु पाठ यानी द्वितीय चरित पाठ भी प्रतिदिन कर लें तो पर्याप्त है।
लघु पाठ के बाद भी 11, 21 या 108 बार नर्वाण मंत्र का जप कर लेना चाहिए.
इसके बाद क्षमा प्रार्थना और आरती कर लें.
लघु पाठ से भी श्री दुर्गा सप्तशती पाठ का पूरा फल मिलता है.
विवशता होने या समय का अभाव होने पर क्या विकल्प हैं?
कामकाजी हैं और दफ्तर पहुँचना है. अधिक देर तक बैठने में असुविधा है या कोई अन्य विवशता है तो आप निम्न का पालन कर सकते हैंः
- सप्तश्लोकी दुर्गा
- सिद्धकुंजिका स्तोत्रम
सात श्लोकों में दुर्गा सप्तशती का सार बताया गया है. सप्तश्लोकी पाठ के बाद सिद्ध कुंजिका का पाठ कर लें. उसके बाद नवार्ण मंत्र का जप, क्षमा प्रार्थना और आरती कर लें। इस तरह भी नवरात्रि में पूजा की जा सकती है.
सप्तश्लोकी दुर्गा-7 श्लोकों में पूरी दुर्गासप्तशती पाठ का फल
फिर भी यदि संभव हो तो नवरात्र के नौ दिनों में तीन बार करके निम्न विधि से कम से एक बार संपूर्ण श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ कर लेना चाहिए.
- एक दिन प्रथम चरित,
- दूसरे दिन द्वितीय चरित और
- तीसरे दिन तृतीय चरित
ऐसे करके भी पूरी दुर्गासप्तशती का एक पाठ तो कर ही लेना चाहिए.
सिद्ध कुंजिका स्तोत्रः दुर्गा सप्तशती के समान फलदायी है. जप की विधि और सावधानियां
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की वाकार विधिः
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की वाकार विधि सात दिनों में तेरह अध्यायों के पाठ की एक अन्य सरल विधि है. जो लोग नवरात्रि में नियम से सप्तशती पाठ करते हैं वे समय के अभाव में इस विधि का प्रयोग कर सकते हैं.
सात दिनों में श्री दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों के पाठ का क्रमः
- प्रथम दिनः प्रथम अध्याय
- दूसरे दिनः द्वितीय व तृतीय अध्याय
- तीसरे दिनः चतुर्थ अध्याय
- चौथे दिनः पंचम, षष्ठ, सप्तम व अष्टम अध्याय
- पांचवें दिनः नवम एवं दशम अध्याय
- छठे दिनः ग्यारहवां अध्याय
- सातवें दिनः द्वादश एवं त्रयोदश अध्याय
इस तरह सात दिनों में श्री दुर्गा सप्तशती का पूरा पाठ किया जा सकता है.
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हवन, कन्या पूजन और ब्राह्मण भोजनः
सप्तशती पाठ या माता के किसी भी साधना की निश्चित संख्या पूरी हो जाने के बाद हवन, कन्या पूजन एवं ब्राह्मण भोजन अवश्य करा देना चाहिए. वैसे तो पूजा-पाठ में सर्वाधिक भक्त श्रद्धाभाव का है लेकिन जहां तक संभव हो विधि-विधानों का पालन कर लेना चाहिए.
नवरात्रि में कन्या पूजन क्यों होता है?
नवरात्रि में श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ में हवन और कन्या पूजन का बहुत महत्त्व बताया गया है. देवी कन्या का स्वरूप हैं. इसलिए कन्या पूजन तो कर ही लेना चाहिए. गृहस्थ भक्तों को तो खासतौर से यह करना चाहिए.
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ में ध्यान देने की कुछ अन्य बातेंः
एक बात विशेष तौर पर ध्यान रखने की है. श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ आप चाहे जिस विधि से भी कर रहे हों, आपको प्रतिदिन पूजा के बाद क्षमा प्रार्थना अवश्य करनी चाहिए. यदि आप संस्कृत पढ़ सकते हैं तो प्रभु शरणं ऐप के श्री दुर्गा शरणं सेक्शन में क्षमा प्रार्थना मंत्र दिया गया है. बहुत सरल संस्कृत है. वहां इसका हिंदी अर्थ भी मिल जाएगा.
यदि उतना नहीं करना चाहते तो दंडवत लेटकर माता से अपने तरीके से पूजन के दौरान हुए अपराधों के लिए क्षमा प्रार्थना अवश्य कर लें. यह प्रतिदिन करना है.
पूजा के उपरांत श्री दुर्गा माता की आरती भी अवश्य करें.
साफ सुथरे वस्त्र पहनकर पूजा करनी चाहिए. जिस वस्त्र को पहनकर शौच गए हों, या कुछ खाया हो उसे धोने के बाद ही पहनें.
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मां दुर्गा की पूजा आराधना से जुड़ी सारी बातें प्रभु शरणं ऐप में एक स्थान पर मिल जाएंगी. आप ऐसा समझें कि पूरी दुर्गा सप्तशती, माँ दुर्गा की पूजा की विधियां, सारे मंत्र, आरती सबकुछ एक स्थान पर मिल जाएगा. ऐप कैसे डाउनलोड कर सकते हैं वह नीचे बताया गया है.
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ का लाभ और उद्देश्यः
मां दुर्गा के भक्त सुख-शांति, धन-धान्य की प्राप्ति, रोग-दोष एवं कष्टों से मुक्ति एवं अन्य मनोकामनाओं के लिए पाठ करते हैं. वे नौ दिनों की पूजा में जगदंबा से यह सब वरदान मांगते हैं. पुत्र माता से तो माँगते ही हैं. यह उनका अधिकार भी है.
लेकिन श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ और दुर्गा जी की पूजा के पीछे एक अन्य उद्देश्य भी है. दुर्गा जी के उपासकों को कभी भी किसी कन्या का अपमान नहीं करना चाहिए. कन्याओं में माता का स्वरूप देखना चाहिए. कन्याओं को माता के स्वरूप मानते हुए उन्हें मान-सम्मान केवल नवरात्रि में नहीं अपितु हमेशा देना चाहिए. ऐसा नहीं करने पर श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ का अर्जित फल क्षीण हो जाता है. ऐसा शास्त्रों में कहा गया है.
संपूर्ण श्री दुर्गा सप्तशतीः 13 अध्याय
ऊपर दिए लिंक से आप श्री दुर्गा सप्तशती के अध्यायों को क्रमवार पढ़ सकते हैं.
।।जय जगदंबा, जय जदतजननी।।
हम सब भक्तों पर अपनी असीम कृपा बनाए रखें.
संकलन व संपादनः राजन प्रकाश
श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की विधि की यह पोस्ट आपको कैसी लगी? अपने विचार लिखिएगा. यह पोस्ट श्री दुर्गा सप्तशती ग्रंथ में बताई गई विधियों का सरल शब्दों में संकलन मात्र है. इसका उद्देश्य आपको जानकारी देना मात्र है. आप संपूर्ण पुष्ट जानकारी के लिए श्री दुर्गा सप्तशती ग्रंथ को देखें.
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