उपयोगी कथा …शीश दिए जो गुरु मिले तो भी सस्ता जान- कबीरदास को रामनाम की दीक्षा कैसे मिली!
कबीर ने सोचा कि अगर पहुंचे हुए महात्मा से गुरुमंत्र नहीं मिला तो मनमानी साधना से ‘हरिदास’ बन सकते हैं ‘हरिमय’ नहीं बन सकते. किस प्रकार से भी हो पर रामानंद जी महाराज से ही मंत्रदीक्षा लेनी है.
स्वामी रामानंदजी तड़के 3 से 4 के बीच गंगा स्नान करने जाते थे. उनकी खड़ाउं की आवाज से पहचान लेना कठिन न था.
कबीर ने इसे ही सही अवसर समझा. गंगा घाट पर रामानंदजी के पहुंचने के सारे रास्ते में बाड़ लगा दी और एक ही मार्ग खाली रखा.
अंधेरा था, इसलिए उस मार्ग में सुबह के अंधेरे में कबीरदास जी लेट गए ताकि गुरु महाराज के आज तो दर्शन हो ही जाएं.
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