अंधे को मिले बटेर, मति का देखो फेरः अयोग्य को मिली तंत्रशक्ति उसका नाश कर देती है
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जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना whatsapp से मिलने लगेगी। इस लाइऩ के नीचे फेसबुकपेज का लिंक है. इसे लाइक कर लें ताकि आपको पोस्ट मिलती रहे.ईश्वर सबको शक्ति क्यों नहीं देते. कुछ लोगों को शक्ति देऩे के बाद उनसे वह शक्ति वापस भी ले लेते हैं, कारण ईश्वर सदा यह चाहते हैं कि शक्ति योग्य व्यक्ति के पास ही हो.
यदि शक्ति किसी कुपात्र को प्राप्त हो जाती है तो वह उससे सबका नाश करता है, अपना भी और दूसरों का भी. वह शक्ति चाहे तंत्रशक्ति हो या धनशक्ति. एक तांत्रिक जिसे अपने गुरू से असाधारण शक्तियां मिल सकती थीं उसकी छोटी सोच ने उसका अंत कर दिया.
एक साधक ने गुरू को प्रसन्न किया और कठिन तंत्र साधना की. गुरु की कृपा से उसने वह विद्या सीख ली कि जिससे आकाश में जब नक्षत्रों की एक खास स्थिति बनती थी तब वह आकाश से रत्नों का वर्षा करा सकता था.
साल में एक बार ऐसा अवसर आता था. उसने विद्या के प्रयोग से आकाश से रत्नों की खूब बारिश कराई और इस तरह आसानी से विपुल धन उसे प्राप्त हो गया.
अब धन मिल गया तो साधना-पूजा तो कब की पीछे छूट गई. जीवन में सारे ठाट-बाट आ गए. परिवार मजे से रहने लगा. बस रत्नवर्षा वाली साधना न भूल जाए इतना ध्यान रखता था.
एक दिन वह साधक जंगल के मार्ग से किसी दूसरे प्रदेश को जा रहा था. उसके शरीर पर अब अमीर व्यापारियों जैसे वस्त्र-आभूषण थे.
साधक का कोई निशान तो उसमें दिखता ही न था. रास्ते में चोरों के समुदाय ने उसे पकड़ लिया और कहा- तुम्हारे वस्त्राभूषण अमीरों के जैसे मालूम पड़ते हैं.
जो कुछ पास है उसे तो निकालकर यहां रखो ही साथ ही अपनी दौलत का अता-पता बताओ ताकि उसे भी हम लूट कर ला सकें. जब तक तुम्हारी सारी दौलत नहीं मिलती तब तक तुम्हें पेड़ से बांध कर रखेंगे. यदि धन हाथ न लगा तो तुम्हें मार देंगे.
साधक बुरी तरह चंगुल में फंस गया. जो पास में था वह उतारकर रख ही दिया पर चोरों को घर भेजकर परिवार की सारी सम्पदा लुटवा लेने की बात गले न उतरी. इसलिए उसे एक पेड़ से बांध दिया गया.
लुटेरों ने उसे सोचने-विचारने को एक सप्ताह का समय दिया. यदि एक सप्ताह के भीतर उन्हें धन नहीं मिलता तो फिर वे उसका अन्त ही कर देंगे. प्राण जाने की चिन्ता में वह बहुत दुःखी रहने लगा.साधक को तभी ध्यान आया कि अरे कल ही तो रत्न बरसाने वाला नक्षत्र है. क्यों न एक प्रयोग इन्हीं लोगों के लिए कर दिया जाय. जो धन प्राप्त होगा उसे इन्हें सौंपकर जान छुड़ा ली जाए.
यह सोचकर उसने डाकुओं को समीप बुलाया और सारी रहस्य वार्ता कह सुनाई कि वह तांत्रिक है. वह एक खास नक्षत्र में धनवर्षा कराता है.
कल वह नक्षत्र है जिसमें तंत्र-मंत्र की शक्ति से रत्न बरसाये जा सकते हैं. यदि उसे आवश्यक पूजा करने की छूट दे दी जाय तो वह विपुल धन प्राप्त करा देगा.
तांत्रिक ने कहा- कल आकाश से रात के समय जितने भी रत्न बरसेंगे वे सब तुम लोग रख लो. उसके बगले मुझे बंधन मुक्त कर देना.
डाकू इस पर सहमत हो गये और उसके बंधन खोल दिए. आवश्यक पूजा अर्चना करने के लिए जो साधन जरूरी थे वे मंगा दिये.
साधना सही थी. दूसरे दिन रात को रत्न बरसे. डाकुओं ने उन्हें बटोरा और निहाल हो गए. शर्त के अनुसार उसे बंधनमुक्त भी कर दिया. लूटे गये वस्त्र आभूषण भी लौटा दिए.
साधक ने इस विपत्ति से छुटकारा पाने पर ठंडी सांस ली और आगे के रास्ते पर चल पड़ा. उस डाकू समुदाय का सरगना बहुत चतुर था. उसने साथियों को छोड़कर अकेले उसका पीछा किया.हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.रास्ते में जो और डाकू मिले उन्हें साथ लेता गया. निर्जन स्थान देखकर उन लोगों ने साधक को फिर पकड़ लिया और अगली रात फिर रत्नवर्षा करा देने का आदेश दिया. आनाकानी करने पर जान मारने की बात भी स्पष्ट कर दी.
तंत्र साधक ने कहा ऐसा नक्षत्र तो एक वर्ष बाद आएगा तब तक के लिए आप ठहरें. मैं लौटकर उस समय वह लाभ दिला दूंगा. अभी तो मुझे जाने दें कुछ आवश्यक काम है.
डाकुओं को उसकी बात पर विश्वास न हुआ. उन्होंने साफ कर दिया कि यदि कल तुमने फिर से रत्न वर्षा न कराई तो तुम्हें जानसे मार दिया जाएगा.
साधक उन्हें समझाता रहा कि तंत्र की साधना जिस नक्षत्र में होगी वह साल में एक बार ही आता है. उन्हें सालभर प्रतीक्षा करनी होगी.
डाकुओं को एक वर्ष बाद नक्षत्र आने की बात पर विश्वास न हुआ. वे उसे बहानेबाजी मानते रहे. उसे नहीं छोड़ा. दूसरी रात प्रतीक्षा में देखी गई.
जो संभव ही न था वह कैसे होता! डाकू उसके वध की तैयारी करने लगे तो साधक ईश्वर को और गुरू को याद करने लगा.
उसने सारा प्रयास करके देख लिया कोई लाभ नहीं हुआ. उसे पछतावा हो रहा था कि काश साधकों का कोई लक्षण उसमें मौजूद रहता आज यह दिन न देखना पड़ता.
कहां उसके गुरू में इतनी शक्ति थी कि दुष्ट उनका स्पर्श करते तो जल जाते आज उनका सबसे प्यारा शिष्य डाकुओं के लिए धन का प्रबंध करके भी उनके हाथों मरने वाला है. वह सोच ही रहा था कि डाकुओं ने उसकी गर्दन काट दी.
सिद्धि से चमत्कार आते हैं लेकिन उसका एक बड़ा जोखिम है. सब पर एक सिद्धि काम नहीं कर सकती. एक का यदि कोई काम साधक ने सिद्धि के बल पर करा दिया और वह कार्य अन्यों के लिए न कर पाया तो शत्रुता में जान जाने का खतरा भी रहता है.
सृष्टि का विधान है कि योग्य पात्रों को ही ऐसी शक्तियां मिलती हैं वह भी कुछ श्रेष्ठ प्रयोजनों के लिए, परोपकार के लिए. कुपात्र को विद्या मिलती है तो वह अपना और समाज दोनों का अनिष्ट कर लेता है.
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