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राजा ने कहा- मुझे तो हीरे की परख का ज्ञान नहीं. मंत्री बोले- हम भी हिम्मत नहीं कर सकते क्योंकि दोनों समान हैं. हारने पर धन के गंवाने की चिंता नहीं लेकिन इससे राजा की प्रतिष्ठा गिरेगी. इसलिए हम भी नहीं हिम्मत करेंगे.
एक अंधा आदमी लाठी खटखाता आगे आया और राजा से प्रार्थना की- मैं तो जन्म से अंधा हू फिर भी मुझे एक अवसर दें ताकि मैं भी एक बार अपनी बुद्धि को परखूं. हो सकता है कि सफल भी हो जाऊं. यदि सफल न भी हुआ तो वैसे भी आप तो हारे ही हैं.
राजा को लगा कि इसे अवसर देने मे क्या हर्ज है! राजा ने उसे बुद्धि आजमाने की आज्ञा दे दी. उस अंधे आदमी को दोनो चीजें छुआ दी गयीं फिर पूछा गया इसमें कौन सा हीरा है और कौन सा कांच?
उस आदमी ने दोनों को मुठ्ठी में रखा फिर मिनटभऱ बता दिया कि कौन हीरा है और कौन कांच. उसने सही पहचान की थी. हीरे का मालिक जो इतने राज्यों से जीतता आया था वह हैरान होकर नतमस्तक हो गया.
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