January 21, 2026

श्रीराम के प्रेम से धन्य हो गए निषादराजः बालक निषाद और बालरूप भगवान के भेंट और मित्रता का प्रसंग

अब आप बिना इन्टरनेट के व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र , श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ तथा उपयोग कर सकते हैं.इसके लिए डाउनलोड करें प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें

निषादराज के पिता की चक्रवर्ती महाराज दशरथ से मित्रता थी. वह दशरथ के दर्शन करने समय-समय पर अयोध्या आया करते थे.

दशरथजी के घर में प्रभु का अवतार जब हुआ वह तब तक निषाद वृद्धावस्था में पहुंच गए थे लेकिन संतान की बधाई लेकर स्वयं अयोध्या आए. दशरथ के चारों पुत्र साधारण पुरूष तो थे नहीं, सभी अवतारी थे.

उनके दर्शनों से निषादराज को जो आनंद की अनुभूति हुई उसकी कोई सीमा ही न थी. उनका तो हृदय वहां से जाने को ही नहीं करता था. भला भगवान के बालरूप के आनंद से कौन वंचित रहना चाहेगा!

जब बृद्ध निषाद अयोध्या से लौटे, तो प्रभु की सुंदरता, उनकी बाल लीलाओं का वर्णन करते नहीं अघाते. यह सब सुनकर छोटे निषाद के मन में बड़ी इच्छा हुई कि क्यों न मैं भी दर्शन कर लूं.

शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

See also  अर्जुन से अज्ञानता में हुया श्रीराम का अपमान, हनुमानजी ने सबक सिखाया तो देने लगे प्राण रीक्षा में असफल अर्जुन देने चले प्राण, श्रीकृष्ण से मिला जीवनदान
Share: