हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]

गौतम बोले– सम्पूर्ण लोकों को पवित्र करने वाली गंगे! नरक में गिरते हुए मुझ गौतम को आप पवित्र कर दें. महादेव ने भी कहा– ‘देवि! इस मुनि को पवित्र करो और वैवस्वत मनु के अट्ठाइसवें कलियुग तक यहीं वास रहो.

गंगा ने भगवान शिव से कहा- प्रभु मैं अकेली यहां अपना निवास बनाने में असमर्थ हूं. यदि भगवान महेश्वर, अम्बिका और अन्य गणों के साथ यहां रहें तथा मैं नदियों में श्रेष्ठ स्वीकार की जाऊं, तभी इस धरातल पर रह सकती हूं.

भगवान शिव ने गंगा का अनुरोध स्वीकार करते हुए कहा- तुम्हारी इच्छा के अनुसार मैं भी यहां रहूंगा. उसके बाद विविध देवता, ऋषि, अनेक तीर्थ तथा सम्मानित क्षेत्र भी वहां आ पहुँचे.

उन सभी ने गौतम, गंगा तथा महादेव का पूजन किया. उनकी आराधना से प्रसन्न गंगा और महेश्वर ने कहा– हम आपका प्रिय भी करना चाहते हैं. इसलिए मन में कोई अभिलाषा हो तो कहें.

देवताओं ने महादेव और गंगा से कहा- प्रभु हमारे और मनुष्यों का प्रिय करने के लिए आप और देवी गंगा यहीं निवास करने की कृपा करें.

शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

2 COMMENTS

    • आपके शुभ वचनों के लिए हृदय से कोटि-कोटि आभार.
      आप नियमित पोस्ट के लिए कृपया प्रभु शरणम् से जुड़ें. ज्यादा सरलता से पोस्ट प्राप्त होंगे और हर अपडेट आपको मिलता रहेगा. हिंदुओं के लिए बहुत उपयोगी है. आप एक बार देखिए तो सही. अच्छा न लगे तो डिलिट कर दीजिएगा. हमें विश्वास है कि यह आपको इतना पसंद आएगा कि आपके जीवन का अंग बन जाएगा. प्रभु शरणम् ऐप्प का लिंक? https://goo.gl/tS7auA

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here