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धर्म-कर्म से वंचित होने से गौतम का जीवन कष्टमय हो गया. उन्होंने उन मुनियों, ब्राह्मणों से गोहत्या का प्रायश्चित बताने की विनती की.

सबने कहा– तीन बार यह बोलते हुए पृथ्वी की परिक्रमा करो कि मैंने गोवध किया. उसके बाद एक महीने तक व्रत करो. व्रत के बाद ब्रह्मगिरि की एक सौ एक परिक्रमा करो. तब गोहत्या दोष से मुक्ति होगी.

गौतम ने कहा कि पृथ्वी की तीन परिक्रमा तो मनुष्य के जीवन में संभव ही नहीं. उन्हें दूसरा विकल्प बताना होगा जिसे वह पूर्ण करके पापमुक्त हो सकें.

ब्राह्मणों ने विकल्प कहा- यदि गंगाजी को यहां लाकर उनके जल में स्नान करो. फिर एक करोड़ पार्थिव शिवलिंग बनाकर महादेव की उपासना करो. ब्रह्मगिरि पर्वत की ग्यारह परिक्रमा के बाद एक सौ कलश के गंगा जल से शिवलिंग का अभिषेक करो तो शुद्धि होगी.

गौतम ने अहल्या के साथ ब्रह्मगिरि की परिक्रमा की. निष्ठा के साथ पार्थिव लिंगों का निर्माण कर महादेव की आराधना करने लगे. इनकी अटूट भक्ति से भोलेनाथ प्रसन्न हो गए.

प्रकट होकर महादेव ने कहा- मैं आपकी भक्ति से प्रसन्न हूं. अपनी इच्छा बताओ. गौतम ने शिव स्तुति की और बोले- प्रभु मैंने गोवध जैसा पाप किया. आप मुझे निष्पाप बनाने की कृपा करें.

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2 COMMENTS

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