Kindness_of_Shibi
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उशीनर के राजा शिवि ययाति की बेटी माधवी के पुत्र थे. माधवी और उनके पुत्रों के बारे में हम भागवत प्रसंगों में बताएंगे. शिवि के दान धर्म की कथा देवतागण स्वर्गलोक में भी सुनाया करते थे. इंद्र और अग्नि ने शिवि की दानशीलता की परीक्षा लेने की सोची.

अग्निदेव ने कबूतर का रूप धरा और इंद्र ने बाज का. कबूतर अपनी जान बचाने के लिए उड़ता हुआ शिवि की गोद में पहुंचा और प्राणरक्षा की गुहार लगाई.

शिकार का पीछा करता इंद्र के रूप में बाज भी वहां आ पहुंचा. कबूतर ने कहा- महाराज अभी मेरी आयु बहुत कम है. परिवार का मैं ही सहारा हूं. आप मेरी जान बचाइए.

बाज ने कहा- महाराज मैं वृद्ध हो चुका हूं. ज्यादा तेज पक्षी का शिकार नहीं कर सकता. कई दिनों से कुछ नहीं खाया है. आप मुझसे मेरा आहार छीनकर पाप के भागी न बनें.

कबूतर और बाज दोनों को इंसानों की तरह बोलते देख शिवि चकित थे. राजा को लगा कि जरूर ये दोनों दिव्य प्राणी हैं जो किसी शाप से पक्षी बन गए हैं. इनके साथ अगर उचित न्याय न हुआ तो वह पाप के भागी बनेंगे.

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1 COMMENT

  1. बहुत प्रेरक कहानी है आप का प्रयास सराहनीय है बहुत बहुत धन्यवाद

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