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यदि तुम महोदर की शरण-ग्रहण कर देवताओं, मुनियों तथा ब्राह्मणों को धर्मपूर्वक जीवन बीताने में व्यवधान न पैदा करने का वचन दो तो दयामय प्रभु तुम्हें क्षमा कर देंगे. यदि तुम ऐसा नहीं करते हो तो रणभूमि में तुम्हारी रक्षा असम्भव है.
मोहासुर का अहंकार नष्ट हो गया. उसने भगवान विष्णु से निवेदन किया. आप परम प्रभो भगवान महोदर को मेरे नगर में लाकर उनके दुर्लभ-दर्शन का अवसर प्रदान करें. भगवान महोदर ने नगर में पदार्पण किया.
मोहासुर ने उनका अभूतपूर्व स्वागत किया. दैत्य युवतियों ने पुष्पवर्षा की. मोहासुर ने भगवान महोदर की श्रद्धा-भक्तिपूर्वक विधि-विधान से पूजा-स्तुति की. वह भगवान की स्तुति करने लगा.
स्तुति करते हुए उसने कहा- हे प्रभो! अज्ञानवश मेरे द्वारा जो अपराध हुआ हो उसके लिए मुझे क्षमा करें. मैं आपके प्रत्येक आदेश का पालन करने का वचन देता हूं. अब मैं देवों मुनियों के निकट भूलकर भी नहीं जाऊंगा. किसी भी धर्मकार्य में विघ्न नहीं डालूंगा.
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