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एक गरीब रोटी उठाकर लाया क्योंकि उसकी नजर में रोटी ही मूल्यवान थी. एक भक्त ईश्वर की मूर्ति उठाकर लाया. राजा सभी से उन वस्तुओं के बारे में पूछता जो वे उठा थे.

तभी एक योगी आया. वाटिका में काफी देर घूमने के बाद वह खाली हाथ बाहर निकला. राजा योगी से पूछा- आप क्या लेकर आए? योगी ने कहा- मैं आपके बाग से संतोष लेकर आया हूं, महाराज. राजा ने पूछा- यह संतोष क्या सबसे मूल्यवान है?

योगी ने जवाब दिया- हां, महाराज इस वाटिका में आपने जितनी भी वस्तुएं रखी हैं, उन्हें प्राप्त करके खुशी तो जरूर होगी लेकिन वह होगी अस्थाई और क्षणिक. इसे हासिल कर लेने के बाद फिर कुछ और पाने के लिए मन बेचैन होगा.

परंतु जिसके पास सच्चा संतोष है. वह सभी इच्छाओं से ऊपर होगा और सुखी रहेगा. मै वैसे भी यहां कुछ प्राप्त करने के लिए आय़ा ही नहीं था. मैं तो बस देखना चाहता था कि मानव मन को भटकाने के लिए कौन-कौन सी मरीचिकाएं रखी गई हैं.

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