March 13, 2026

गरूड का श्रीकृष्ण से प्रश्न- दानपुण्य और धर्म कर्म से भी सद्गति न हो तो क्या करेंः श्रीकृष्ण ने सुनाया वृषोत्सर्ग का मर्म


आप बिना इन्टरनेट के व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र , श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ तथा उपयोग कर सकते हैं.इसके लिए डाउनलोड करें प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
क्यों हुआ ब्राह्मण का अपहरण, कैसे मिला राजा वीरवाहन को स्वर्ग? श्रीकृष्ण ने बताया गरुड़ को

पक्षीराज गरुड़ अपनी एक शंका लेकर भगवान श्रीकृष्ण के पास पहुंचे. गरुड़ ने उनसे पूछा कि हे भगवन- यदि कोई निरंतर दान पुण्य करता रहे, आपको भजता रहे तीर्थ- यज्ञ आदि करे तो भी कई बार उसे सद्गति की प्राप्ति नहीं होती ऐसा क्यों?

श्रीकृष्ण बोले- गरूड़ सभी धर्म कर्मों के अतिरिक्त वृषोत्सर्ग करना भी आवश्यक है. गरूड़ ने पूछा- प्रभु यह वृषोत्सर्ग क्या है, इसकी विधि क्या है? इसकी महिमा जानने की इच्छा है, कृपया बताएं.

गरुड की शंका के समाधान के लिए भगवान ने एक कथा सुनानी शुरू की. भगवन बोले- गरुड़ ब्रह्माजी के पुत्र महर्षि वशिष्ठ ने राजा वीरवाहन से जो कथा कही थी, वह सुनो. इससे तुम्हारी शंका का समाधान हो जायेगा.

प्राचीन काल में विराधनगर एक बहुत सुंदर नगर हुआ करता था. यहां का राजा था वीरवाहन. वीरवाहन की दयालुता, सत्यवादिता और दान-धर्म का डंका बजता था. प्रजा खुशहाल थी.

एक बार वीरवाहन शिकार के लिए गया. शिकार करते वह जंगल के बहुत भीतर तक गया तो उसे वहां महर्षि वशिष्ठ का आश्रम दिखा. राजा को काफी समय से एक जिज्ञासा थी. उसे जिज्ञासा शांत करने का उचित अवसर लगा और आश्रम में चला गया.

See also  भागवत कथाः शेष के उपरांत श्रीहरि का देवकी के गर्भ में आगमन

शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

Share: