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संक्रांति को क्यों जरूरी है खिचड़ी खाना और खिचड़ी दान करना

संक्रांति पर्व दान का सबसे उत्तम मुहूर्त है. इसमें दान की महिमा के बारे में अनेक शास्त्रों में उल्लेख है. परंतु सर्वाधिक तिल और खिचड़ी की महत्ता है.

संक्रांति के लिए गृहस्थ को उपवास करने से मनाही है. उसे दिन में खिचड़ी और तिल के सेवन के लिए विशेष रूप से कहा गया है. रात्रि में भोजन करने से बचना चाहिए. रात्रिकाल में मीठा भोजन ग्रहण करना चाहिए.

खिचड़ी खाने के पीछे एक बहुत बड़ा कारण है. सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही देवतागण बलिष्ठ होने लगते हैं. देवताओं की शक्तियों का लाभ प्राप्त करने के लिए हमें उनकी आराधना करनी चाहिए.

राशि के ग्रह भी देवता हैं. संक्रांति के दिन सभी का आशीर्वाद एवं कृपा प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए. खिचड़ी का दान एक तरह से सभी ग्रहों को प्रसन्न करने का त्वरित प्रयास माना जा सकता है.

खिचड़ी चावल, काले उड़ड, मूंग, मसूर की दाल, हरी सब्जियों, हल्दी, घी एवं जल आदि से बनती है. चावल चंद्रमा एवं शुक्र का प्रतीक है. काले उड़द शनि को प्रिय हैं. हल्दी बृहस्पति को प्रिय है. हरा बुध का रंग हैं इसलिए सब्जियों के प्रयोग से बुध को प्रसन्न किया जा सकता है. मसूर की दाल मंगल एवं सूर्य के लिए बताया गया है.

प्रस्तुतिः
डॉ. नीरज त्रिवेदी
सहायक प्रोफेसर, ज्योतिष
राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, जयपुर
ज्योतिषाचार्य एवं पीएचडी (ज्योतिषशास्त्र)
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
संपर्क मेलः niraj.trivedibhu@gmail.com

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