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जब भी तुम्हें लगे कि भटक रहे हो तो लोटे के स्थान पर खुद को रख लेना और तत्काल स्वयं को मांजने लगना.
श्रीरामकृष्ण परमहंस जी की इस बात के बड़े गूढ़ अर्थ हैं. प्रत्येक व्यक्ति को इसी प्रकार नियम से स्वयं को शुद्ध रखने का प्रयास करते रहना चाहिए. संसार की बुराइयां आपको घेरने का प्रयास करेंगी, आपको स्वयं को सुरक्षित रखना होगा.
दूसरा यह कि प्रत्येक कार्य चाहे वह देखने में लोटा मांजने जैसा तुच्छ कार्य ही क्यों न हो अगर मनोयोग से किया जाए तो उसमे विशिष्ट चमक बनकर आकर्षण पैदा करता है.
साधारण काम को भी आप अपने असाधारण एकाग्र मनोयोग से विशिष्ट बना सकते हैं, उसका महत्व बढ़ा सकते हैं. आपके आसपास जो भी सबसे अयोग्य व्यक्ति दिखता हो उसमें किसी तरह की योग्यता बढ़ाने का प्रयास करके आप अपना परीक्षण भी कर सकते हैं कि आप कितने अच्छे गुरू हैं.
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