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चित्रकेतु ने बताया- मैं संतानहीन हूं. इसी चिंता में रहता हूं कि मेरे बाद प्रजा का पालन कौन करेगा. अंगिरा ने राजा को एक चरू दिया और कहा इसे अपनी प्रिय रानी को दे दो. वह माता बनेगी.

राजा ने वह चरू अपनी प्रिय पत्नी कृतद्युति को दिया. रानी एक पुत्र की माता बनीं. चित्रकेतु का अधिकांश समय कृतद्युति के साथ बीतने लगा जिससे अन्य रानियों को ईर्ष्या हुई.

ईर्ष्या से एक दिन सब रानियों ने मिलकर राजकुमार को जहर देकर मार दिया. राजा रानी और पूरा राज्य शोक में डूब गया. अंगिरा के सारी बातें पता चलीं. वह नारद के साथ आए.

अंगिरा बोले-जिस बालक से दूर होकर आप इतने दुखी हैं, वह आपका कौन था? आप और वह दो अलग-अलग जीवात्माएं हैं. आपका संबंध इतना ही था कि इस जन्म में वह कुछ समय के लिए आपका पुत्र बना.
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