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विचार जम गया. चारों आपनी विद्या के संयुक्त प्रयास की परीक्षा को तैयार हो गए. फिर वे अपनी विद्या की परीक्षा लेने जंगल में गये. वहां उन्हें एक मरे हुए शेर की हड्डियां मिलीं.
वह बहुत हद तक क्षत-विक्षत और सड़ गल गई थीं. उसे बिना पहचाने ही उन्होंने उठा लिया. एक ने मांस डाला, दूसरे ने उसमें खाल और बाल पैदा कर दिए, तीसरे ने सारे अंग बनाए.
अब वह शेर बनकर तैयार हो चुका था. दिखने में तगड़ा और सुंदर स्वस्थ. बस प्राण ही नहीं थे. निष्प्राण होने के कारण शेर धरती पर पड़ा हुआ था. तीनों की विद्या का परीक्षण हो चुका था.
चौथा अपनी प्रतिभा दिखाने को इतना उतावला हो चुका था. इससे पहले कि उस शेर में प्राण डालने के संबंध में कोई निर्णय होता उसने आव देखा न ताव शेर में प्राण डाल दिए.
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