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तेरी इस तरह अटूट भक्ति और समय व्यर्थ करने वाली पूजा ने आखिर क्या फल दिया है. यह कहकर हंसते हुए गर्व में भरा काल मूर्खता में शिवजी का उपहास करता श्वेत मुनि को लेकर यमलोक की ओर चला.
तभी सामने अचानक अम्बा, गणपति और नंदी प्रकट हो गए. उन्हें देखकर काल ने मुनि को तत्काल छोड़ दिया. काल वहीं भयानक पीड़ा से चीखता हुआ पछाड़ खाकर गिर पड़ा.
कालों के भी काल महाकाल के अंश को देखकर काल स्वयं निश्चेष्ट पड़ा था. अपने भक्त की रक्षा के लिए दौड़े महाकाल की इस कृपा को देखकर देवगण फूलों की वर्षा ऊंचे स्वर में शिव और अम्बा की स्तुति करने लगे.
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Bholenath to bhakt vatsal hai. Mrityu bhi unka kya bigade jo bhakt ho Mahakaal ka. Jai Mrityunjay Bhagwan Mahakaal ki.