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पिछले भाग में आपने पढ़ा-गौतम और अहल्या ने तप से वरुणदेव को प्रसन्न करके अक्षय जलकुंड प्राप्त किया. 100 वर्ष के भीषण सूखे के कारण जीवविहीन हो गए ब्रह्मगिरी क्षेत्र में प्राणियों का पुनः निवास शुरू हुआ.
गौतम कुंड के आसपास बहुत से ब्राह्मण और ऋषि आकर बसे. जल को लेकर अहल्या के साथ ब्राह्मणियों ने विवाद किया और अपने पतियों को गौतम के अनिष्ट के लिए उकसाया.
गणेशजी को प्रसन्न करके सबने गौतम को दुखी करने के लिए उन्हें बाध्य किया. गणेशजी दुर्बल गाय बने और गौतम पर उस गाय की हत्या का आरोप लगा. गोहत्या के अपराधबोध से ग्रस्त गौतम दुख में डूब गए. (अब आगे)
ऋषियों द्वारा अपमानित किए जाने से गौतम वहां से चले गए और अन्यत्र कुटिया बनाई. वे ब्राह्मण वहां भी पहुंच गए और गौतम को गोहत्या दोष से मुक्ति मिलने तक वैदिक अनुष्ठान, यज्ञ-आदि कर्म करने से रोक दिया.
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” Har Har Mahadev “
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