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व्योमासुर फिर एक बालकर को लेकर चला तो पीछे से श्रीकृष्ण ने उसे दबोच लिया. राक्षस बहुत बलवान था लेकिन प्रभु की पकड़ इतनी सख्त थी कि वह छटपटाने लगा.
हारकर उसने अपना असली रूप प्रकट किया. उसका शरीर किसी पहाड़ जैसा विशाल था. वह श्रीकृष्ण के पंजे से खुद को छुड़ाने के लिए उलट-पुलट और गुलाटी मारने लगा परंतु भगवान उसे छोड़े हीं नहीं.
श्रीकृष्ण ने उसे उठाकर जमीन पर पटका और फिर किसी पशु की तरह उसका गला दबाकर उस राक्षस का उद्धार कर दिया. भगवान ने गुफा को तोड़कर अपने मित्रों को निकाला और गायें लेकर घर की ओर चले.
ग्वाल बाल एक दिन में दो-दो बार हुए इस तरह के अनिष्ट के प्रयास से भयभीत थे परंतु श्रीकृष्ण ने उन्हें मोहित करके उनकी स्मृति से सारी बातें मिटा दीं जैसे कुछ हुआ ही न हो.
संकलन व संपादनः राजन प्रकाश
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