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शिष्य बोला- गुरुजी, ऐसा करते हैं कि आदमी और रख लेते हैं जो पहले वाले आदमी पर निगरानी रखे. इस तरह उसे भय रहेगा और मिलावट रूक जाएगी. गुरूजी ने एक और कर्मचारी रख लिया.

कुछ दिनों बाद आश्रम में सुबह-सुबह झगड़ा होने लगा. आश्रम से बाजार के लिए जाने वाले दूध को जब बड़े बर्तन में रखा जा रहा था तो अचानक दूध के बर्तन से एक मछली निकल आई.

बात गुरूजी तक पहुंची. वह गौशाला में आए. शिष्यों की सारी बात उन्होंने बड़े धैर्य से सुनने के बाद कहा- किसी अनैतिक कार्य को रोकने के लिए जितने अधिक निरीक्षक रखा जाए, समस्या उतनी बड़ी होती जाती है.

पहले दूध में पानी मिलाने के अनैतिक कार्य में हिस्सेदारी कम लोगों की थी. वे थोड़ी मिलावट करके अपने लिए पैसे बना रहे थे. जैसे-जैसे उन पर नजर रखने वाले बढ़े, उनके हिस्से भी तय हुए और मिलावट बढ़ती चली गई.

इतना पानी मिलाया जाने लगेगा तो दूध में से तो मछली निकलनी ही थी. मुझे आभास था कि ऐसा ही कुछ होगा मैं तो बस तुम सब को जीवन की एक व्यावहारिक शिक्षा देना चाहता था.

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