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सबसे पहले तो यह ध्यान रखें कि गृहस्थ को हमेशा कमलासन पर विराजमान श्रीलक्ष्मीजी की पूजा करनी चाहिए.

लक्ष्मीजी की पूजा आरंभ करने से पहले कम से कम 5 बार, 11 बार या संभव हो तो एक माला “ऊं गं गणपत्यै नमः” का जप अवश्य कर लेना चाहिए.

कुछ मंत्र बता रहे हैं जिनसे कमलासना लक्ष्मीजी की आराधना करें तो पैसा, पद, मान-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है.
मंत्र जप के समय माता के सामने घी का दीपक जलाएं.
लाल फूल चढ़ाएं एवं सफेद मिठाई का भोग लगाएं. इतना विधि-विधान अक्षय तृतीया के लिए है.

प्रतिदिन की पूजा में यदि माता के सामने दीपक या धूप भी जल रहा हो तो भी चिंता की बात नहीं. भक्त का भाव देखते हैं भगवान न कि फूल-प्रसाद और कर्मकांड.

पहली पूजाः

लक्ष्मी गायत्री मंत्रः

“ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्नयै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्”

इस मंत्र की एक माला कमल पर विराजमान लक्ष्मीजी की प्रतिमा या चित्र के सामने करें. अक्षय तृतीया को तो यथासंभव करें.

इसे साल भर तक प्रतिदिन एक माला करें. इसका जप करने में आपको 4 से पांच मिनट लगेंंगे. जप मानसिक होना चाहिए अर्थात मन में. मंत्र उच्चारण की ध्वनि मुख से बाहर नहीं आनी चाहिए.

माता की प्रतिमा के सामने दीपक या कम से कम धूप जलाकर रखें.

दूसरी पूजाः

मंत्रः
ऊँ कमलवासिन्यै नमः

देवी भागवत में आता है कि इंद्र ने एक करोड़ बार ‘ऊं कमलवासिन्यै नमः’ मंत्र जपकर कमल के आसन पर विराजमान लक्ष्मीजी की आराधना की, तो असुरों द्वारा छीना गया ऐश्वर्य पुनः प्राप्त किया था.

आप प्रतिदिन कम से कम एक माला ऊं कमलवासिन्यै नमः का जप आरंभ करें. इसे भी मानसिक जप रखना है. उच्चारण की ध्वनि बाहर नहीं आनी चाहिए.

इसमें तीन मिनट का समय लगेगा. माता की प्रतिमा के सामने दीपक या धूप जलाए रखें.

तीसरी पूजाः

धनदायक कनकधारा स्तोत्रः

लक्ष्मी प्राप्ति का बहुत कारगर साधन है कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना. कनकधारा मंत्र की विशेषता है कि इसे बिना किसी विशेष माला, जप, पूजा व विधि-विधान से किया जा सकता है. इस स्तोत्र का प्रतिदिन एक बार पाठ करें.

जप करने से पहले यदि कनकधारा यंत्र आपके पास हो तो उसके सामने दीपक और धूप अवश्य जला लें.

कनकधारा यंत्र उपलब्ध न हो तो इंटरनेट से इसका प्रिंट आउट निकाल सकते हैं. हम कनकधारा यंत्र की तस्वीर भी दे रहे हैं.

अगर कुछ संभव न हो तो घर में कमलपुष्प पर आसीन माता लक्ष्मी की फोटो आदि हो तो उसके सामने भी पूजा आरंभ कर सकते हैं.

बाद में भी किसी शुभ मुहूर्त में कभी भी कनकधारा यंत्र लाकर भी घर में स्थापित कर सकते हैं. भगवान शंकराचार्य जी द्वारा रचित यह सिद्ध मंत्र होने के साथ ही चैतन्य भी माना गया है.

माँ लक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए यह यंत्र और स्तोत्र सभी यंत्रों से ज़्यादा महत्वपूर्ण व प्रभावशाली माना गया है. अक्षय तृतीया इसके लिए सबसे उत्तम अवसर है. इसलिए आज से ही इसका आरंभ कर सकते हैं. यदि आज दिन की पूजा हो गई हो तो भी कोई बात नहीं.

संध्याकाल में स्नान करके, साफ वस्त्र धारणकर, माता को धूप-दीप, पुष्प आदि जो भी उपलब्ध सामग्री हो उससे विभूषित करके इसका पाठ आरंभ कर सकते हैं. इसका पाठ फिर नियमित रूप से करना चाहिए.

यदि किसी दिन कनकधारा पाठ नहीं कर पाते हैं तो भी परेशान होने की बात नहीं. माता के सामने विनीतभाव से खड़े होकर क्षमा प्रार्थना कर लें. उस दिन के बदले पाठ अन्य किसी दिन भी कर लें.

कनकधारा यंत्रः
kanakdhara yantra

कनकधारा मंत्र शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

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