January 28, 2026

अक्षय तृतीया बीतने से पहले जरूर पढ़ लें. दूसरा मौका सालभर बाद आएगा

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया या आखा तीज कहा जाता है. अक्षय तृतीया को सूर्य और चंद्र दोनों ही उच्च के होते हैं. इस कारण अक्षय तृतीया को अत्यंत शुभ दिन माना जाता है. पूरे दिन कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है जिसका फल विशेष रहता है. इस बार 7 अप्रैल 2019 को है अक्षय तृतीया.

अक्षय तृतीया को भगवान विष्णु के नर-नरायण, हयग्रीव और परशुराम- तीन अवतार हुए हैं. त्रेतायुग की शुरुआत भी इसी शुभ तिथि से मानी जाती है. इस दिन माता लक्ष्मी की विशेष पूजा करने की रीति है.

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अक्षय तृतीया को माता लक्ष्मी की उपासना से भी विशेष रूप से देखा जाता है.  इस साल यानी 7 मई 2019  में अक्षय तृतीया का अद्भुत संयोग बन रहा है. ऐसा पूरे एक दशक बाद हो रहा है. चार ग्रह- सूर्य, शुक्र, चंद्र और राहु अपनी उच्च राशि में गोचर करेंगे. इससे पहले वर्ष 2003 में 5 ग्रहों का ऐसा योग बना था. कुल मिलाकर देखा जाए तो मानव जीवन पर इनका प्रभाव बेहतर होगा. हालांकि आपकी कुंडली के हिसाब से ग्रहों के प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं.

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अक्षय तृतीया 2019 का शुभ मुहूर्त 
इस मुहूर्त में सोना खरीदना बहुत शुभ माना जाता है.
7 मई – सुबह 06:26 से रात 11:47 तक

गृहस्थों के लिए लक्ष्मी परम आवश्यक है. अक्षय तृतीया माता लक्ष्मी की वर्षभर के लिए विशेष उपासना आरंभ करने का शुभ दिन है. आज हम आपको कुछ उपयोगी मंत्र आदि से परिचित करा रहे हैं जिन्हें आप माता लक्ष्मी के प्रतिदिन पूजन में शामिल कर लें. बहुत ज्यादा विधि-विधान नहीं कहेंगे.

माता लक्ष्मी को अपनी माता समझिए. उनसे अपराधों के लिए क्षमा याचना करिए और आवश्यकतानुसार धन प्रदान करने की याचना करिए. कभी कमी न होगी, आप यकीन करिए. हां, अगर आपकी आवश्यकता ही रोज सुरसा की तरह मुंह फैलाती जाए तो फिर कहना मुश्किल है.

आज आपको मैं प्रतिदिन की पूजा में तीन प्रकार की चीजें बताऊंगा. अपनी सुविधा से इसे आप करें. एक पूजन में आपको दैनिक पूजा में 2 अतिरिक्त मिनट देने होंगे. दूसरे में करीब 4 से 5 मिनट रोज के अतिरिक्त लगेंगे और तीसरी में रोज के 6 से 7 अतिरिक्त मिनट.

आप जिसमें सुविधा महसूस करें वह पूजा करें पर जो भी मंत्र आराधना आज से आप आरंभ करेंगे उसे कम से कम एक साल तक करना है.

इसमें ध्यान देने की एक बात और है कि परिवार की किसी भी महिला चाहे वह माता, सास, बहन, पत्नी, बेटी, का भूले से भी अपमान न हो अन्यथा अपेक्षित फल नहीं मिलता.

अक्षय तृतीया को पूरा दिन शुभ मुहूर्त का होता है. जब सुविधा हो तब से आरंभ कर सकते हैं पूजन. यदि भोजन आदि ग्रहण कर लिया हो तो भी कोई बात नहीं. स्नान कर लें और फिर भगवती से पूजा की अनुमति लेकर पूजा आरंभ कर सकते हैं.

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अक्षय तृतीया को श्रीलक्ष्मीनारायणजी का भी पूजन करना चाहिए.

लक्ष्मीनारायण की प्रतिमा या चित्र के सामने पहले एक घी का दीप जला लें. फिर जल, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर जो भी उपल्बध हों उनसे क्रमश: स्नान कराके फिर वही पाँचो समान एक में मिलाकर पंचामृत बनाकर स्नान कराएं. इसके बाद मूर्ति कोगंगा जल से स्नान कराएं.

भगवान को तिलक लगाएं, धूप दीप दिखाकर तुलसी डालकर मिश्री चढ़ाएं. यह सभी कार्य करते हुए ऊँ लक्ष्मीनारायणाय नम: मंत्र का जप करते रहें. जब सभी समान चढ़ा देने पर फिर इसी मंत्र का जितना माला जप कर सके तो करें.

वैसे अक्षय तृतीया को कोई भी समय शुभ होता है पर आज दोपहर दो बजे से पहले कर लेना ज्यादा शुभ है. घर का कोई भी सदस्य यह पूजा कर सकता है. समय न मिल पाए तो शाम को भी कर सकते हैं. श्रीलक्ष्मीनारायण जी की मूर्ति न हो तो श्रीकृष्ण या श्रीरामजी की मूर्ति भी मान्य है.

माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने की तीन सरल पूजा अगले पेज में देखें.

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