January 28, 2026

भागवत कथा पर गर्व है तो इसे पढ़कर गर्व कई गुना बढ़ जाएगा.

भागवत कथा में व्यासपीठ क्यों बनाई जाती है? भारत भूमि पर जातीय विभाजन को मिटाने का अनूठा प्रयोग है व्यास पीठ. इस कथा को अंत तक पढ़ें भागवत कथा के पीछे का सामाजिक विज्ञान जानकर मन गर्व से फूल जाएगा.

भागवत कथा में व्यासपीठ क्यों बनाई जाती है
धार्मिक व प्रेरक कथाओं के लिए प्रभु शरणम् के फेसबुक पेज से जु़ड़े, लिंक-
[sc:fb]

प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना  WhatsApp से चाहते हैं तो अपने मोबाइल में हमारा नंबर  9871507036 Prabhu Sharnam के नाम से SAVE कर लें. फिर SEND लिखकर हमें इसी पर WhatsApp कर दें. जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना  WhatsApp से मिलने लगेगी. यदि नंबर सेव नहीं करेंगे तो तकनीकि कारणों से पोस्ट नहीं पहुँच सकेंगे.

 

भागवत कथा शृंखला प्रभु शरणम् एप्प में चल रही है. चतुर्मास अवधि में पूरी भागवत कथा को हम आध्यात्मिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करेंगे. सभी महापुराणों में भागवतमहापुराण की महत्ता इस कारण भी अधिक हो जाती है क्योंकि यह पुराण मोहबंधन से छूटने के मूल संदेश को बार-बार और विविध प्रकार के उदाहरणों से कहता है.

भागवत अद्भुत ग्रंथ है. इसका हर स्कंध आधुनिक विज्ञान के किसी न किसी सिद्धांत को प्रतिपादित करता है. हमारे ग्रंथ ज्ञान-विज्ञान के अद्भुत स्रोत हैं, हमें उन्हें नए दृष्टिकोण से भी देखना चाहिए.

हिंदू धर्म से जुड़ी सभी शास्त्र आधारित जानकारियों के लिए प्रभु शरणम् से जुड़ें. सर्वश्रेष्ठ हिंदू ऐप्प प्रभु शरणम् फ्री है.
Android मोबाइल ऐप्प डाउनलोड करने के लिए यहां पर क्लिक करें

अपने पुत्र शुकदेव जी के अल्पायु में गृहत्याग करने और ईशलीला गान के प्रति प्रवृति होते देख स्वयं व्यासजी जैसे परमज्ञानी भी मोहित हो गए थे. महाभारत के युद्ध की विभीषका देख चुके व्यासजी अत्यंत क्षुब्ध थे और मन व्याकुल था तो नारदजी ने उन्हें भागवत कथा रस में डूबने को कहा था. उसी भागवत कथा रस से उनके हृदय को शीतलता मिली थी. प्रसन्नता की बात है कि हमारे देश में भागवत कथा की परंपरा पड़ी है. भागवत पुराण को सरलता से पढ़ने के लिए प्रभु शरणम् एप्प डाउनलोड कर लें. लिंक ऊपर है.

See also  श्राद्ध ग्रहण करने पितृलोक से पृथ्वी पर आते हैं पितर? गरूड़ पुराण से जानिए.

आपने भागवत कथा सुनी होगी या टीवी चैनल पर देखी होगी. वहां पर कथाकार एक ऊंचे आसन पर बैठते हैं और प्रतिदिन कथा से पूर्व विधिवत पूजन होता है. इसे व्यासपीठ कहते हैं. पर क्या कभी यह जाना कि व्यासपीठ क्या है? क्यों बनाई जाती है व्यासपीठ? क्या महत्व है व्यासपीठ का? हमें चीजों को शुरू से जानना चाहिए. किसी भी भागवत कथा में यह बात शायद ही बताई जाती हो. व्यासपीठ की एक बड़ी सुंदर कथा है.

सारे पुराण की कथाएं सूतजी के मुख से क्यों है जबकि पुराणों की रचना तो वेद व्यासजी ने की है. यह एक अद्भुत संयोग है. जातिबंधन को चुनौती देने का वंदनीय उदाहरण और प्रयास. दुख की बात है कि ज्यादातर भागवत कथाकार इस मूलमंत्र को समझ ही नहीं पाते. यदि आपने पुराण पढ़ा हो तो उसमें सूतजी का जिक्र सुनने में आता होगा. या मैं आपको पुराण की कथाएं सुनाते हुए कहता हूं- सूतजी बोले. आपको इस पर हैरानी होती होगी कि जब पुराण वेद-व्यासजी ने लिखे तो फिर सभी पुराण सूतजी के मुख से क्यों सुनाया जाता है.

इसके पीछे की एक सुंदर कथा पद्मपुराण में आती है. सूतजी से तात्पर्य वास्तव में सूत परिवार में जन्मे महर्षि रोमहर्षण और उनके पुत्र उग्रश्रवा से है. भगवान वेद-व्यास के शिष्य महर्षि रोमहर्षण को व्यासजी ने स्वयं व्यासपीठ सौंपी थी.

रोमहर्षण का जन्म सूत जाति में हुआ था. ब्राह्मणी माता तथा क्षत्रिय पिता से उत्पन्न सन्तान को सूत जाति में गिना जाता था. इसका मुख्य काम रथ हांकना घुडसाल संभालना था. इन्हें वेद विद्या ग्रहण करने का अधिकार नहीं था. महर्षि वेद व्यास बहुत ही उदार विचारों के थे. रोमहर्षण को स्तुति पाठ करते देखा. शास्त्रों-पुराणों में उनकी रुचियों को देख व्यास जी ने रोमहर्षण को अपना शिष्य बना लिया.

See also  श्रेष्ठ दानशील राजा रंतिदेव की कथा

प्रतिभावान रोमहर्षण ने पुराण विद्या का ऐसा पारायण किया कि उनकी प्रतिभा देकर सभी चमत्कृत हो गए.

शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.