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कुछ समय बाद वे विद्या सीखकर आपस में मिले. एक ने कहा- मैंने ऐसी विद्या सीखी है कि मैं मरे हुए प्राणी की हड्डियों पर मांस मज्जा चढाकर ऐसा बना सकता हूं कि वह सजीव सा दिखे. पर कमी बस इतनी है कि उस पर चमड़ा और बाल नहीं उगा सकता.

दूसरा बोला- इसमें परेशान होने की क्या बात है. मैंने जो विद्य सीखी है वह अनूठी है. मैं हुए मरे प्राणी पर भी खाल और बाल पैदा कर सकता हूं. इसके बाद वह वह बिल्कुल वैसा दिखने लगता है जैसा कि वह सच में होता है.

तीसरे ने कहा- मैं किसी क्षत-विक्षत प्राणी के सारे अंग उपांग पहले जैसा बन सकता हूं यहां तक कि वे सब जीवित प्राणियों के अंगों की तरह काम करने लगेंगे पर हां मैं मरे में जान नहीं डाल सकता हूं.
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