[sc:fb]

खोजते-खोजते उसे नदी के किनारे एक बाघ दिख भी गया. भोजन करने के बाद वह बाघ पानी पीने आया था. बाघ उस महिला को देखते ही दहाड़ा.

डर के मारे वह वहां से भागी लेकिन उसे तो पति का प्रेम जीतना ही था क्योंकि उसके बिना जीवन फिजूल था. सो उसने प्राण संकट में डालने का निश्चय किया.

वह कई दिनों तक उसी समय नदी किनारे पहुंचती जब बाघ पानी पीने आता. बाघ भोजन करके पानी पीने आता था इसलिए उसे भोजन की आवश्यकता थी नहीं जो महिला पर हमला करे.

धीरे-धीरे उस महिला के मन से बाघ का खौफ कम होता गया. उधर बाघ को भी महिला की मौजूदगी की आदत पड़ गयी.

दोनों ही एक दूसरे के साथ पहले के मुकाबले कुछ सहज हो गए. अब तो बाघ ने उसे देखकर दहाड़ना भी बंद कर दिया था.

महिला बाघ के लिए मांस भी लाने लगी.

बाघ किसी पर तभी हमला करता है जब वह भूखा हो. बिना वजह वह शिकार कभी करता नहीं. लेकिन वह तो तब आती थी जब भोजन कर चुका होता था और अब तो वह बाघ के लिए उपहार भी लाने लगी.

तो भला बाघ उससे क्यों बैर करता!

कई महीनों के लगातार प्रयास के बाद आखिरकार दोनों में दोस्ती हो गई. दोस्ती धीरे-धीरे इतनी बढ़ गई कि अब वह बाघ के पास जाकर पुचकारने-थपथपाने भी लगी थी.

एक दिन हिम्मत करके बाघ की मूंछ का एक बाल भी निकाल लिया और संन्यासी को दिया.

शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here