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संन्यासी अभी भी ‘मौत’ के आगे कांप रहा था.

कुत्ते का मन हुआ कि संन्यासी को उसके हाल पर छोड़कर आगे बढ़ जाए लेकिन मन नहीं माना. वह दौड़कर विषधर के पीछे पहुंचा और पूंछ पकड़कर झाड़ियों की ओर उछाल दिया.

संन्यासी की जान में जान आई. वह आभार से भरे नेत्रों से कुत्ते को देखने लगा.

कुत्ता बोला- ‘महाराज, जहां तक मैं समझता हूं, मौत से वही ज्यादा डरते हैं, जो केवल अपने लिए जीते हैं.

जीवन का समय-समय पर आत्ममूल्यांकन बहुत जरूरी है. हम संसार से छल कर सकते हैं, छुपा सकते हैं स्वयं से नहीं. इसलिए अपने हर कार्य को अपने अंतर्मन की कसौटी पर कसते रहना चाहिए.

जो नियमित रूप से ऐसा करते रहते हैं उनमें उनके अंदर का ईश्वर जाग्रत रहता है. जिस दिन हम स्वयं से मुंह फेरने लगते हैं उस दिन से पतन का आरंभ हो जाता है.

जो सिर्फ अपनी चिंता करें वैसे इंसान और पशु में क्या फर्क रहा. पशु भी दूसरों की चिंता कर लेते हैं.

गेरुआ पहनकर निकल जाने या कंठी माला डालकर प्रभु नाम जपने से कोई प्रभु का प्रिय नहीं हो जाता. जिसके मन में दया और करूणा नहीं उसे तो ईश्वर भी नहीं पूछते.

धार्मिक प्रवचन उन्हें उनके पापबोध से कुछ पल के लिए बचा ले जाते हैं. जीने के लिए संघर्ष अपरिहार्य है. संघर्ष के लिए विवेक लेकिन मन में यदि करुणा-ममता न हों तो ये दोनों भी आडंबर बन जाते हैं.

मित्रों हम खोज-खोजकर धार्मिक, आध्यात्मिक और प्रेरक कहानियां लेकर आते हैं. आप फेसबुक के माध्यम से यहां तक पहुंचते हैं. आपको सरल रास्ता बताता हूं एक साथ ऐसी धार्मिक और प्रेरक कई सौ कहानियां पढ़ने का.

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4 COMMENTS

    • आपके शुभ वचनों के लिए हृदय से कोटि-कोटि आभार.
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  1. श्री राम जय राम जय जय राम… श्री राम जय राम जय जय राम… श्री राम जय राम जय जय राम .. राम राम जी

    • आपके शुभ वचनों के लिए हृदय से कोटि-कोटि आभार.
      आप नियमित पोस्ट के लिए कृपया प्रभु शरणम् से जुड़ें. ज्यादा सरलता से पोस्ट प्राप्त होंगे और हर अपडेट आपको मिलता रहेगा. हिंदुओं के लिए बहुत उपयोगी है. आप एक बार देखिए तो सही. अच्छा न लगे तो डिलिट कर दीजिएगा. हमें विश्वास है कि यह आपको इतना पसंद आएगा कि आपके जीवन का अंग बन जाएगा. प्रभु शरणम् ऐप्प का लिंक? https://goo.gl/tS7auA

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