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सेठ ने दोनों को बहुत-सा धन दिया और एक दासी को यात्रा में उनकी सेवा के लिये उनके साथ भेज दिया. कहार सब को पालकी में बिठा कर चल दिये. नगर से बाहर एक निर्जन रास्ते के बाद वन पड़ता था.
जंगल में आकर लड़के ने स्त्री से कहा- यहाँ डाकू हो सकते हैं, बहुत डर है, इससे पहले कि कोई ऐसी आशंका सकार रूप ले, वे हमें लूट लें, तुम अपने गहने उतारकर मेरी कमर में बाँध दो.
लड़की ने ऐसा ही किया, जंगल बीता. इसके बाद लड़के ने कहारों को धन देकर डोले को भी वापस करा दिया और दासी को मारकर कुएं में डाल दिया. सबसे निबटने के बाद स्त्री को भी एक अंधे कुएं में पटक कर आगे बढ़ गया.
कुएं में पड़ी रत्नावती अचेत पड़ी रही. चेतना लौटी तो वह रोने लगी. संयोग से एक यात्री उधर से जा रहा था. रोने की आवाज़ सुनकर वह वहाँ आया उसे कुएँ से निकाला. उसको खाना पानी दिया.
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