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पांडव जिस मुहूर्त के लिए तरसते रहे वह हमें नारायण की कृपा से सुलभ हुआ है. इसे गंवाना तो जैसे हाथ में आए किसी खजाने को कुंए में डाल देने जैसा होगा.

आज एक और अच्छा संयोग है. आज शनिदेव की जयंती है. शनिदेव भगावन शिव की कृपा से ग्रहों के बीच दंडाधिकारी बने हैं, और वह श्रीहरि के शिष्य हैं. अर्थात यह संयोग तो अद्भुत है.

इसलिए आज शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनिमंत्र ऊं प्रां प्रीं प्रौं सः शनिश्चरायै नमः का जप और दशरथकृत शनिस्तोत्र भी पढ़ना चाहिए. काले कपड़े, काला तिल, छतरी या जूता या तेल गरीबों को दान करें. संभव हो तो कोई काला वस्त्र धारण कर मंदिर जाएं.

विष्णुसहस्त्रनाम में नारायण के नाम बड़े-बड़े पदों में हैं इसलिए उन लोगों को थोड़ी परेशानी होती है जो इसके अभ्यस्त नहीं है. हमने प्रभु शरणं एप्प में पदों का विच्छेद करके सबसे सरल रूप में और सिर्फ वही पद दिए हैं जिनमें श्रीहरि के नाम का वर्णन है.

दशरथकृत शनि स्तोत्र और विष्णुसहस्त्रनाम भी आपके एप्प में है. यह सब मंत्र-चालीसा सेक्शन में है. श्रीविष्णुशरणम् सेक्शन और शनिदेव शरणम् सेक्शम में देख सकते हैं.

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प्रभु शरणम्

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