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उन्होंने अंधक को समझाया कि यदि उसने देवी पार्वती को प्राप्त करने की इच्छा नहीं छोड़ी तो असुर जाति का विनाश हो जाएगा. प्रह्लाद ने उसे समझाने के लिए कई कथाएं सुनाईं.

इधर शुक्राचार्य उन असुरों की जीवित कर रहे थे जिनका महादेव ने वध किया था. यह बात शिवगणों ने जाकर महादेव को बता दी. महादेव अत्यंत क्रोधित हुए. शुक्राचार्य को सबक सिखाने के लिए महादेव ने उन्हें लील लिया.

शुक्राचार्य महादेव के उदर में 100 साल तक रहे और समस्त संसार को देखा. वह महादेव के कान के रास्ते निकल आए. फिर से उन्होंने अपना वही कार्य शुरू कर दिया. जिसे मृत संजीवनी विद्या आती हो उसका वध तो हो नहीं सकता.

महादेव ने फिर से उन्हें लील लिया. इस बार वह नाक के रास्ते बाहर निकल आए. शिव ने फिर से उन्हें लील लिया और इस बार उन्होंने लिंग को छोड़कर शरीर के सभी अंगों को बंद कर दिया.
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