हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]

चोर गोकुल पहुंच गया. एक स्थान पर नदी किनारे भगवान ने उसे गाय चराते उसी रूप में दर्शन दिया जो उसने मंदिरों में देखी थी. जितनी छवि देखी थी सारी एक-एक करके दिखा दी. आभूषणों के साथ.

चोर उनके पैरों में गिर पड़ा. प्रभु ने आभूषण उतारकर दिए और बोले- लो तुम इसके लिए व्यर्थ ही इतनी दूर चले आए. मैं तो कब से तुम्हें दे रहा था. चोर बोला- आपको देख लिया तो आभूषणों की चमक फीकी पड़ गई. अब तो आपको चुराउंगा.

भगवान हंसे- मुझे चुराओगे, कहां लेकर जाओगे? चोर बोला- वह तो नहीं पता सोचकर बताता हूं लेकिन आभूषण नहीं चाहिए. अब तो मुझे आपकी ही लालसा है. चोर सोचता रहा, प्रभु हंसते रहे. चोर ने बुद्धि दौड़ा ली लेकिन कोई स्थान ही न सूझा.

उसे चिंता थी कि इतनी मेहनत से वह इन्हें चुरा ले जाए और फिर सुरक्षा न कर पाए तो कोई और चुरा लेगा. सोचते-सोचते उसे नींद आने लगी.

उसको उपाय सूझा – जब तक मैं निर्णय नहीं कर लेता कि आपको कहां रखूंगा, आप मुझे रोज दर्शन देते रहो जिससे मुझे भरोसा रहे कि मेरी चोरी का सामान सुरक्षित है. प्रभु खूब हंसे. उन्होंने कहा- ठीक है ऐसा हो होगा लेकिन तुम्हें कुछ आभूषण तो लेना होगा.

शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here