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शिवलिंग के षोडषोपचार पूजन की विधि एवं मंत्रः
- सर्वप्रथम “मानो महान्तम्” मंत्र से शिवजी का आह्वान करें.
- “मनोsस्तु नीलग्रीवाय” मंत्रोच्चार के साथ पाद्य यानी पैर धोने का जल समर्पित करें.
- रूद्रगायत्री मंत्रों का उच्चारण करते हुए अर्घ्य समर्पित करें.
- “त्र्यंम्बकं यजामहे” मंत्रपाठ के साथ आचमनीय समर्पित करें.
- “पयः पृथ्वियां पयो अंतरिक्षे” मंत्र से स्नान के लिए शुद्ध सुगंधित जल समर्पित करें.
- “नमो घृष्णवे मंत्रोच्चार” करते हुए वस्त्र और फिर उत्तरीय यानी गमछा समर्पित करें.
- “नमः श्वभ्यः नमः पार्याय” मंत्र से बिल्वपत्र, गंध, पुष्प तथा अक्षत आदि अर्पित करें.
- “नमः कपर्दिन” मंत्र से धूप समर्पित करें.
- “नमः आशवे” से दीप दिखाएं.
- “इमा रूद्राय कपर्दिने” से फल चढ़ावें.
- “हिरण्यगर्भः समवर्ताग्रे” मंत्र से दक्षिणा चढ़ावें.
- “मानस्नोक” मंत्र से साष्टांग प्रणाम करना चाहिए.
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इसके उपरांत पंचांग पाठ करके इस मंत्र से ध्यान करना चाहिए-
ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारूचन्द्रावतंसम्,
रत्नाकल्पोज्जवलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।
पद्मासीनं समन्तात् स्तुतममरगणैः व्याघ्रकृत्तिं वसानम्,
विश्ववाद्यम् विश्वबीजं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्।।
सांष्टांग दंडवत प्रणाम के बाद अपराध क्षमा प्रार्थना करना आवश्यक है. दोनों हाथ जोड़ लें और इस प्रकार स्तुति करें-
अज्ञानाद्यदि वा ज्ञानात् जपं पूजादिकं मया।
कृतं तदस्तु सफलं कृपया तव शंकर।।
इस प्रकार भगवान की विधिवत पूजा करके पूजा की सफलता की प्रार्थना करें फिर प्रदक्षिणा करें. इसके बाद देवागात्विति मंत्र से उस पार्थिव शिवलिंग का जल में विसर्जन कर देना चाहिए.
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