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पाटली अचानक एक पुरुष को अपने सामने देखकर चौंकी और कुछ लज्जित भी हुई लेकिन वह इतने पहरे में से बचकर उस तक आ पहुंचा यह सोचकर क्रोध न किया. दोनों में बातचीत हुई, जल्द ही बात बढ गयी.
दोनों ने गन्धर्व विवाह कर लिया. फिर दोनों हर रात मिलने लगे. कुछ दिनों बाद पाटली के शरीर पर पर कुछ निशान देख कर रनिवास के अनुभवी पहरेदारों ने राजा को खबर की.
राजा ने एक चतुर स्त्री को राजकुमारी की निगरानी के लिए तैनात कर दिया. उस गुप्चचर स्त्री ने पुत्रक को रात में राजकुमारी से मिलते देख लिया.
वह स्त्री शोर नहीं मचा सकती थी नहीं तो राजकुमारी की ही हंसाई होती. सो उसने चोरी से पुत्रक के वस्त्रों पर महावर से चिन्ह बना दिए ताकि सुबह अलग से पहचान लिया जाए.
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