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यह कहकर शिवजी अंतर्धान हो गये. राम ने पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करते हुये सभी तीर्थों में स्नान ही नहीं किया वरन उपवास, जप, तप, होम एवं देवालयों में दर्शन इत्यादि भी किया. पूरी तरह से पवित्र होकर वहीं लौट आए जहां शिवजी के दर्शन हुए थे.

राम ने पुनः कठोर तप कर भगवान शिव व माता पार्वती को प्रसन्न किया. यह वह समय था जब असुरों ने देवताओं को भीषण युद्ध में बुरी तरह हरा दिया और उनका सब वैभव लूट लिया था. सारे देवता हाथ जोड़ कर भगवान शंकर के पास पहुंचे.

देवताओं ने भगवान शिव की स्तुति की और कहा- हम आपकी शरण में हैं. असुरों के अत्याचार से मुक्ति दिलाएं. भगवान शंकर बोले- हिमवान पर्वत पर एक मुनिपुत्र तपस्या कर रहा है. आप वहां जायें और उसे लेकर आएं.

शिवजी का आदेश पाकर महोदर नामक देव राम के पास भेजे गये. वे हवा से भी तेज चले और शीघ्र ही हिमवान पर्वत पहुंचे जहां राम तपस्या कर रहे थे. उन्होंने राम से कहा- हे तपस्वी आपको भगवान शिव याद कर रहे हैं. उन्होंने आपको बुलाया है.
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