हमारा फेसबुक पेज लाईक करें.[fblike]

मूकासुर ढेर हो गया. ज़मीन पर गिरते ही उसका असली रूप प्रकट हो गया. किरात नारियों के वेश में आए शिवगणों ने अपने स्वामी की जय-जयकार शुरू कर दी. इससे अर्जुन को विस्मय हुआ.

अर्जुन ने कहा- किरात शूकर मेरे बाण से मरा है. मेरे बाण से उसके प्राण निकल चुके थे तब तुम्हारे बाण ने उसे छुआ. परंतु तुम्हारे सेवक तुम्हारी जयकार कर रहे हैं. मुझे इससे कोई परेशानी नहीं परंतु तुम तो स्वीकार करो कि शूकर को तुमने नहीं मारा.

किरात ने कहा कि शूकर उन्हीं के बाण से मरा है. अर्जुन झूठ बोल रहे हैं. अर्जुन ने गर्व में भरकर चुनौती दे दी- कौन श्रेष्ठ धनुर्धर है इसका निर्णय होना चाहिए. मुझसे युद्ध को तैयार हो?

दोनों ने अपने अस्त्र-शस्त्र एक दूसरे की ओर चलाने शुरू कर दिए. देखते ही देखते भयंकर बाण-वर्षा शुरू हो गई लेकिन कुछ ही देर बाद अर्जुन का तूणीर बाणों से ख़ाली हो गया.

बाण खत्म हो गए तो अर्जुन ने किरात को लपककर अपने धनुष की प्रत्यंचा में फांस लिया किंतु एक ही क्षण में किरात ने अर्जुन से धनुष छीनकर दूर फेंक दिया.

अर्जुन चिढ़कर तलवार लेकर किरात की ओर झपटे किंतु जैसे ही अर्जुन ने तलवार किरात के सिर पर मारी, तलवार टूट गई. अर्जुन निहत्थे हो गए तो एक पेड़ उखाड़कर किरात पर फेंका.

शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here