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हनुमानजी तो जैसे सुनने को तैयार ही नहीं थे.
शनिदेव फिर चिल्लाए- त्राहि माम त्राहि माम! हे रामदूत, हे आंजनेय! मैं उसको भी पीड़ित नहीं करूंगा जो आपका स्मरण करेगा. मुझे पीड़ा से मुक्ति दिलाएं. हनुमानजी ने कहा, अभी तो पांचवां पर्वत बाकी है. शनिदेव ने उनसे याचना की कि बजरंग बली कृपया आप मुझे मुक्त करें.
शनि के कोप से बचने के लिए बजरंग बली का स्मरण बहुत प्रभावी होता है. शनिदेव ने हनुमानजी से उस पीड़ा से राहत के लिए तेल मांगा था. शनिदेव के प्रकोप से बचने के लिए हनुमानजी के स्मरण के साथ तेलदान किया जाता है.
संकलन व संपादनः प्रभु शरणम्
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