उनमें से कुछ, किसी और की दुश्मनी अपने सर मोल नहीं लेना चाहते थे। उसकी एक गुंडा, चोर मण्डली थी, जो अपने गुरु की आज्ञा का पालन मदारी के बन्दर की तरह करती थी, खैर, गाँव के सभी लोगों का एक ही जगह जाकर बहुत बड़ा हुजूम इकठ्ठा हो गया, ये फूलन सिंह का घर था

सर्प के काटने से फूलन सिंह का शरीर लगातार शिथिल अवस्था में पहुँच रहा था, कुछ जानकर लोगों ने काटे हुए स्थान पर, नस्तर लगा दिया, तो दूसरों ने उस घाव में मिर्च भर दी, ताकि जहर का असर कम बना रहे।

कुछ ने उसके हाथ की कोहनी के पास कपड़े से मजबूती से बाँध दिया था, लेकिन इतना सब कुछ करने के बाद भी जहर किसी बाधा दौड़ के एथलीट की भांति सभी बाधाओं को पार करता हुआ पूरे शरीर में फ़ैलता जा रहा था।

अब कुछ लोगों ने फूलन सिंह के शरीर को उस चबूतरे पर लाकर नीम के पत्तों के बीच दबा दिया।

अब इंतज़ार था……….उन भगत, बायगीरों का, जो मंत्रों से सर्पविष, उतारते हैं।

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