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श्रीराम ने कहा उसे लेने हनुमानजी रात्रि के प्रथम प्रहर से कैलाश गए हुए हैं. अभी तक लौटे नहीं हैं. आते ही होंगे. आचार्य ने आदेश दे दिया विलम्ब नहीं किया जा सकता. उत्तम मुहूर्त बीत रहा है. इसलिए अविलम्ब यजमान की पत्नी बालुका-लिंग विग्रह स्वयं बना लें.

सीताजी ने आचार्य के निर्देश पर बालुका लिंग विग्रह बनाया. श्रीसीताराम ने वही महेश्वर लिंगविग्रह स्थापित किया. आचार्य ने पूर्ण विधि-विधान से अनुष्ठान सम्पन्न कराया. दक्षिणा की बारी आई तो विभीषण आदि चिंतित हुए कि कहीं रावण दक्षिणा में श्रीराम से अयोध्या लौटने को न कह दे.

भगवान श्रीराम ने पूछा- आचार्य आपकी दक्षिणा? आचार्य के शब्दों ने फिर से सबको चौंका दिया- घबराओ नहीं यजमान. जो स्वयं स्वर्ण से बनी नगरी का स्वामी है उसे एक वनवासी यजमान क्या संपत्ति दक्षिणा में दे सकता है.

श्रीराम ने कहा- अपने आचार्य कि जो भी मांग हो मैं उसे पूर्ण करने की प्रतिज्ञा करता हूं.रावण ने मांगा- जब आचार्य मृत्यु शैय्या ग्रहण करे तब यजमान सम्मुख उपस्थित रहे. मैं यही दक्षिणा मांगता हूं.

श्रीराम ने कहा- ऐसा ही होगा आचार्य. यजमान ने वचन दिया और समय आने पर निभाया भी. यह दृश्य वार्ता देख-सुनकर सभी उपस्थित जन समुदाय के नेत्र भर गए. सभी ने एक साथ इस अद्भुत आचार्य को प्रणाम किया.

रावण जैसे भविष्यदृष्टा ने जो दक्षिणा माँगी, उससे बड़ी दक्षिणा क्या हो सकती थी? जो रावण यज्ञकार्य पूरा करने हेतु राम की बंदी पत्नी को शत्रु के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है, वह राम से लौट जाने की दक्षिणा कैसे मांग सकता है?

रावण शापित होकर पृथ्वी पर आया था और उसे मुक्ति नारायण के हाथों ही हो सकती थी. पाप का दंड मिलना ही है चाहे आप कितने भी विचारवान और ज्ञानी क्यों न हो. इसलिए रावण जैसा पापी लंका का स्वामी तो हो सकता है देवलोक का नहीं. देवलोक के लिए देवत्व चाहिए.

अधर्म बलवान हो सकता लेकिन उसका बल एक न एक दिन धराशाई होता ही जिस प्रकार रावण जैसे त्रिलोकविजयी का हुआ.

(रामेश्वरम में लिखा हुआ है कि इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना श्रीराम ने रावण द्वारा करवाई थी. बाल्मीकि रामायण और तुलसीकृत रामायण में इस कथा का वर्णन नहीं है पर तमिल भाषा में लिखी महर्षि कम्बन की ‘इरामावतारम्’ में यह कथा है.)

संकलनः मनोज त्रिपाठी
संपादनः प्रभु शरणम्

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3 COMMENTS

  1. aage ki ek katha me to aap ne kaha tha ki baluka sivling ki stapna lanka vijaya ke bad sitaji k hato hui thi
    ye dono kathao ka bhed samjane ki krupa kare

    • आपके शुभ वचनों के लिए हृदय से कोटि-कोटि आभार.
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