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तुम्हें बता दूं कि मैं अभी एक ऐसे उपकरण के साथ यहां विद्यमान हूं, जिसके माध्यम से धनुर्धारी लक्ष्मण यह दृश्यवार्ता स्पष्ट रूप से देख-सुन रहे हैं. जब मैं वहां से चलने लगा था तभी धनुर्वीर लक्ष्मण ने आचमन करके अपने त्रोण से पाशुपतास्त्र निकालकर संधान कर लिया है.

उन्होंने मुझसे कहा है कि रावण से कह देना कि यदि किसी ने भी मेरा विरोध करने या उद्दंडता की चेष्टा की तो यह पाशुपतास्त्र समस्त दानव कुल के संहार का संकल्प लेकर तुरन्त छूट जाएगा. आप मुझे अविलम्ब उत्तर देकर शीघ्र प्रस्थान की व्यवस्था करें ताकि लक्ष्मणजी मुझे देखकर निश्चिंत हों.

उपस्थित दानव भयभीत हो गए. प्रहस्थ पसीने से लथपथ हो गया. लंकेश भी कांप उठा. पाशुपतास्त्र महेश्वर का अमोघ अस्त्र है.सृष्टि में एक साथ दो धनुर्धर प्रयोग ही नहीं कर सकते. भले ही मेघनाद के पास भी पाशुपतास्त्र है लेकिन जब लक्ष्मण ने उसे संधान स्थिति में ला ही दिया है, तब स्वयं भगवान शिव भी उसे उठा नहीं सकते. उसका तो कोई प्रतिकार है ही नहीं.

रावण यह सोचकर बेचैन हो गया. उसने जामवंतजी से कहा-आप अपने शिविर को लौटें. मैं आचार्यत्व स्वीकार करता हूं. जामवंत को विदा कर लंकेश ने सेवकों को शिवलिंग स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री जमा करने का आदेश दिया और स्वयं अशोक वाटिका पहुँचा.

पूजन का विधान है कि जो सामग्री यजमान नहीं जुटा सकता उसकी व्यवस्था आचार्य का परम कर्त्तव्य होता है. अशोक वाटिका पहुंचकर रावण ने सीताजी से कहा-राम लंका विजय की कामना से समुद्रतट पर महेश्वर लिंग विग्रह की स्थापना करने जा रहे हैं और रावण को आचार्य वरण किया है.

यजमान का अनुष्ठान पूर्ण हो यह दायित्व आचार्य का होता है. तुम जानती हो कि अर्द्धांगिनी बिना गृहस्थ के अनुष्ठान अधूरे रहते हैं. विमान आ रहा है, उसपर बैठ जाना. ध्यान रहे कि तुम वहां भी रावण के अधीन ही रहोगी. अनुष्ठान समापन के बाद यहां आने के लिए विमान में पुनः बैठ जाना.

स्वामी ने जिसे आचार्य स्वीकारा है वह स्वयं का भी आचार्य हुआ यह समझते हुए जानकीजी ने दोनों हाथ जोड़कर मस्तक झुका दिया. रावण ने भी सौभाग्यवती भव कहते हुए आशीर्वाद देकर आचार्य का दायित्व निभाया.

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3 COMMENTS

  1. aage ki ek katha me to aap ne kaha tha ki baluka sivling ki stapna lanka vijaya ke bad sitaji k hato hui thi
    ye dono kathao ka bhed samjane ki krupa kare

    • आपके शुभ वचनों के लिए हृदय से कोटि-कोटि आभार.
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