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इंद्र ने कहा – महिमा तो बहुत है, पर क्या है यह ठीक-ठीक नहीं पता, यह तो ब्रह्मा जी ही बता सकते है! वह लड़का बोला – अच्छा तो देवराज को भी नहीं पता. आप भी पालकी में लग जाइए.
अब उसकी पालकी में एक ओर यमराज दूसरी ओर इंद्र लगे और ब्रह्मा जी के पास पहुंचे! ब्रह्मा जी ने सोचा- यह कोई महान पुण्यात्मा है, जिसे यम और इंद्र ने पालकी में उठा रखा है. ब्रह्माजी ने पूछा- ये कौन संत है?
यमराज ने कहा – यह पृथ्वी से आया है और एक बार ‘राधा’ नाम लेने की क्या महिमा है – पूंछ रहा है! हम दोनों नहीं बता पाए तो पालकी में लग गए. आप तो परमज्ञानी हैं. उत्तर देकर हमें मुक्त कराइए.
ब्रह्मा जी ने कहा –महिमा तो अनंत है, पर ठीक-ठीक तो मुझे भी नहीं पता, महादेव ही बता सकते है! लड़के ने कहा – परमपिता अब आप भी तीसरी जगह पालकी में आप लग जाइए. ब्रह्मा जी भी लग गए!
तीनों पालकी लेकर शंकरजी के पास गए. शंकरजी ने कहा ये कोई खास लगता है, जिसकी पालकी को यमराज, इंद्र, ब्रह्मा जी, लेकर आ रहे हैं.
ब्रह्मा जी ने कहा- ये पृथ्वी से आया है और एक बार राधा-नाम लेने की महिमा पूछ रहा है. हमें तो पता नहीं, आप को तो जरुर पता होगा, आप तो समाधि में सदा उनका ही ध्यान करते हैं.
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